भारतीय रेलवे द्वारा अपने कर्मचारियों को अलग-अलग प्रकार की सुविधाएं दी जाती हैं। इनमें से एक सुविधा ऐसी भी है, जिसे रेलवे अपने कर्मचारियों व उनके परिवार को विशेष रूप से देता है। यह सुविधा PTO कहलाती है, जो कि कर्मचारियों और उनके परिवार के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। क्या आप इस सुविधा के बारे में जानते हैं, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
रेलवे में क्या होती है PTO की सुविधा
भारतीय रेलवे में PTO यानि Privilege Ticket Order रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को दी जाने वाली एक विशेष सुविधा है। यह सुविधा सभी श्रेणी के नियमित रेलवे कर्मचारियों Group A, B, C, और D को दी जाती है, जिससे वे अपने व्यक्तिगत या पारिवारिक सफर के लिए बेहद सस्ती दरों पर रेल टिकट बुक कर सकते हैं।
PTO सुविधा क्या है और यह कैसे काम करती है?
पीटीओ एक तरह का कंसीशन वाउचर' या पास होता है, जिसके माध्यम से रेलवे कर्मचारी को यात्रा टिकट के मूल किराए पर 66.6% यानि दो-तिहाई की छूट मिलती है। कर्मचारी को टिकट बुक कराते समय पूरे किराए की जगह केवल 33.3% किराया ही चुकाना होता है।
क्लास के हिसाब से मिलता है PTO
भारतीय रेलवे में कर्मचारी जिस पोस्ट या ग्रेड पर कार्यरत होता है, उसी हिसाब से उसे AC 1st Class, AC 2 Tier, AC 3 Tier या Sleeper Class के पीटीओ पास जारी किए जाते हैं।
एक वर्ष में कितने PTO मिलते हैं?
रेलवे सेवा के नियमों के अनुसार, पीटीओ का कोटा तय होता है। रेलवे में नौकरी जॉइन करते ही कर्मचारी पीटीओ का हकदार हो जाता है। आपको बता दें कि फ्री पास सेवा के शुरुआती वर्षों में सीमित मिलते हैं, वहीं पीटीओ का नियम अलग है। प्रत्येक रेल कर्मचारी को प्रति वर्ष 4 सेट पीटीओमिलते हैं। यहां 1 सेट का मतलब आने और जाने,दोनों का टिकट होता है। यदि कर्मचारी चाहे, तो इन्हें 8 सिंगल जर्नी पीटीओ के रूप में भी ले सकता है।
PTO पर कौन-कौन यात्रा कर सकता है?
कर्मचारी अपने पीटीओ में अपने आश्रितों का नाम जुड़वा सकता है, जिसमें खुद रेल कर्मचारी और उनकी पत्नी या पति, अविवाहित पुत्र 21 वर्ष की आयु तक या पढ़ाई करने की स्थिति में अधिक आयु तक, अविवाहित या विधवा बेटियां, आश्रित माता-पिता यदि वे कर्मचारी पर पूरी तरह निर्भर हों।
