भारत कुल 9 देशों के साथ अपनी सीमा साझा करता है। इसनमें 7 देशों से जमीनी, तो 2 देशों के साथ जलीय सीमा लगती है। इन सभी पड़ोसी देशों के बारे में आपने पढ़ा और सुना ही होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत का एक पड़ोसी देश ऐसा भी है, जो कि आज तक कभी गुलाम नहीं बना है। कौन-सा है यह देश, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
भारत से लगने वाले पड़ोसी देश
भारत से जमीनी सीमा साझा करने वाले देश
-बांग्लादेश(4096 किमी)
-पाकिस्तान(3323)
-चीन(3488)
-नेपाल(1751 किमी)
-म्यांमार(1643 किमी)
-भूटान(699 किमी)
-अफगानिस्तान (106 किमी)
जलीय सीमा वाले देश
-श्रीलंका
-मालदीव
कभी गुलाम नहीं हुआ यह देश
भारत का वह पड़ोसी देश, जो यूरोपीय औपनिवेशिक काल के दौरान कभी किसी विदेशी ताकत का गुलाम नहीं हुआ, वह नेपाल है। 18वीं और 19वीं सदी में जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर अपना कब्जा स्थापित कर लिया था और दुनिया भर के सभी देशों को अपना उपनिवेश बना लिया था, तब भी नेपाल ने अपनी संप्रभुता और आजादी को बनाए रखा।
नेपाल क्यों नहीं हुआ गुलाम
नेपाल के एकीकरण के जनक राजा पृथ्वी नारायण शाह ने विभिन्न रियासतों को मिलाकर एक मजबूत नेपाली साम्राज्य का निर्माण किया था। यहां के गोरखा सैनिक अपनी वीरता, युद्ध-कौशल और रणनीतिक सूझबूझ के लिए जाने जाते थे। नेपाल का अधिकांश हिस्सा बड़ी हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं, घने जंगलों और दुर्गम घाटियों से घिरा हुआ था। उस दौर में विदेशी सेनाओं के लिए नेपाल के अंदर प्रवेश करना और लंबे समय तक रसद पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण था।
एंग्लो-नेपाल युद्ध और सुगौली की संधि
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने नेपाल पर कब्जा करने के लिए युद्ध लड़ा था। इस युद्ध में गोरखा सैनिकों ने ब्रिटिश सेना को कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि, 1816 में दोनों पक्षों के बीच 'सुगौली की संधि'हुई, जिसके तहत नेपाल को अपने तराई और पर्वतीय क्षेत्रों का कुछ हिस्सा जैसे गढ़वाल, कुमाऊं और सिक्किम का भाग अंग्रेजों को सौंपना पड़ा, लेकिन अंग्रेजों ने नेपाल को कभी अपने सीधे साम्राज्य में नहीं मिलाया।
अंग्रेजों ने नेपाल को बफर स्टेट क्यों बनाए रखा
अब सवाल है कि आखिर अंग्रेजों ने नेपाल को बफर स्टेट क्यों बनाए रखा था?दरअसल, ब्रिटिश भारत और चीन के बीच नेपाल एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच यानि बफर एरिया की तरह काम करता था। अंग्रेज गोरखा सैनिकों की सैन्य क्षमता से वाकिफ थे। उन्होंने नेपाल सरकार के साथ समझौता करके ब्रिटिश सेना में गोरखा सैनिकों की भर्ती शुरू की, जिन्होंने प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटिश साम्राज्य के लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पढ़ेंः नेपाल की सबसे लंबी नदी
