Jan Vishwas Bill 2026: संसद से हरी झंडी, छोटे अपराधों के नियम होंगे आसान, यहां देखें हर एक अपडेट

Last Updated: Apr 3, 2026, 10:29 IST

जन विश्वास बिल 2026 को संसद से मंजूरी मिल गई है। इस कानून के तहत छोटे अपराधों को गैर-अपराधिक बनाया जाएगा और कई पुराने नियमों को आसान किया जाएगा। 79 केंद्रीय कानूनों में संशोधन कर 784 प्रावधान बदले गए हैं। इसका उद्देश्य कारोबार को बढ़ावा देना, मुकदमों का बोझ कम करना और आम लोगों को राहत देना है।

Jan Vishwas Bill 2026: संसद से हरी झंडी, छोटे अपराधों के नियम होंगे आसान, यहां देखें हर एक अपडेट
Jan Vishwas Bill 2026: संसद से हरी झंडी, छोटे अपराधों के नियम होंगे आसान, यहां देखें हर एक अपडेट

Jan Vishwas Bill 2026: जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026 संसद से पास हो गया है। यह 2025 के पुराने बिल की जगह लाया गया है, जिसे वापस ले लिया गया था। नए विधेयक के तहत 79 केंद्रीय कानूनों में बदलाव किए गए हैं और कुल 784 प्रावधानों में संशोधन हुआ है। इसका उद्देश्य छोटे अपराधों को गैर-अपराधिक बनाना, नियमों को सरल करना और कारोबार के माहौल के साथ-साथ आम लोगों की जिंदगी को आसान बनाना है।

संसद से विधेयक पारित  

गुरुवार को संसद ने जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी। राज्यसभा में इसे वॉयस वोट से पास किया गया, जबकि इससे एक दिन पहले लोकसभा भी इसे पारित कर चुकी थी। इस विधेयक का उद्देश्य छोटे अपराधों को गैर-अपराधिक बनाना और नियमों को सरल करना है। 

79 कानूनों में बदलाव, 784 प्रावधान संशोधित

यह विधेयक 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन करता है। इनमें से 717 प्रावधान छोटे अपराधों को डिक्रिमिनलाइज करने के लिए और 67 प्रावधान लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए बदले गए हैं। यह कदम देश के कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

कई मंत्रालयों से जुड़ा बड़ा सुधार

इसमें कोयला, वाणिज्य एवं उद्योग, शिपिंग, शहरी विकास और परिवहन सहित 23 मंत्रालयों से जुड़े कानून शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इससे एमएसएमई और आम नागरिकों को राहत मिलेगी और अनावश्यक कानूनी झंझट कम होंगे।

2025 बिल की जगह नया विधेयक

यह विधेयक पहले लाए गए 2025 के जन विश्वास बिल की जगह लाया गया है। 2025 के बिल में केवल 17 कानूनों में बदलाव का प्रस्ताव था, जिसे लोकसभा की चयन समिति (अध्यक्ष: तेजस्वी सूर्या) के पास भेजा गया था। समिति की सिफारिशों के बाद इसे वापस लेकर 2026 में विस्तारित रूप में नया विधेयक पेश किया गया।  

पीएम मोदी और सरकार की प्रतिक्रिया  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विधेयक के पारित होने पर खुशी जताते हुए इसे “विश्वास आधारित शासन” की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे पुराने और अप्रासंगिक कानून खत्म होंगे, मुकदमों का बोझ घटेगा और लोगों को छोटी-छोटी बातों के लिए कोर्ट नहीं जाना पड़ेगा।    

संसद में चर्चा और विपक्ष की राय

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह कानून सजा की जगह न्याय पर जोर देता है। बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने इसे आजादी के बाद का सबसे बड़ा डिक्रिमिनलाइजेशन अभियान बताया। वहीं, जेडीयू के देवेश चंद्र ठाकुर ने इसे भ्रष्टाचार कम करने वाला कदम बताया। शिवसेना (यूबीटी) के अरविंद सावंत ने अंडरट्रायल कैदियों के लिए भी पहल की मांग की, जबकि अन्य सांसदों ने भी बहस में हिस्सा लिया। 

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Bagesh Yadav
Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

Bagesh Yadav is a journalist and current affairs analyst with over six years of experience in education journalism, national and international affairs, and digital media. He has contributed to India’s leading knowledge platforms, including Vision IAS and Only IAS, and currently serves in a senior editorial role at Jagranjosh.com, where he leads coverage across the Current Affairs and General Knowledge sections. His expertise spans breaking news, government policy analysis, world affairs, sports updates, science and technology, and visually engaging infographics. Known for his commitment to factual accuracy, editorial integrity, and audience-first storytelling, Bagesh delivers well-researched, accessible, and impactful journalism that serves millions of students, competitive exam aspirants, and informed readers across India.

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First Published: Apr 3, 2026, 10:29 IST

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