हिमालय पर्वत श्रृंखला दुनिया की सबसे नई पर्वत श्रृंखला है, जिसका निर्माण कुछ करोड़ों वर्ष पहले ही हुआ है। इसे यंग फोल्डेड माउंटेन के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें समय-समय पर हलचल की वजह से पर्वत चोटियों का आकार बदलता रहता है। आपने हिमालय की अलग-अलग चोटियों के बारे में पढ़ा और सुना होगा, जो कि अलग-अलग दिशाओं में हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि हिमालय की सबसे पूर्वी चोटी कौन-सी है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
हिमालय की सबसे पूर्वी चोटी
हिमालय पर्वतमाला की सबसे पूर्वी चोटी नमचा बरवाहै। भौगोलिक लिहाज से यह चोटी हिमालय का पूर्वी सिरा मानी जाती है।
नमचा बरवा की विशेषताएं
नमचा बरवा दक्षिण-पूर्वी तिब्बत यानि चीन के न्यिंगची क्षेत्र में स्थित है, जो भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य की सीमा के बहुत पास है। इस पर्वत चोटी की कुल ऊंचाई 7,782 मीटरहै। दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों की लिस्ट में यह 28वें स्थान पर आती है।
कही जाती है हिमालय का पूर्वी मोड़
यह पर्वत चोटी उस स्थान को मार्क करती है, जहां से हिमालय पूर्व की ओर अपनी यात्रा समाप्त करता है। नमचा बरवा के पास पहुंचकर यरलुंग त्संगपो नदी, जिसे भारत में ब्रह्मपुत्र कहा जाता है, एक अंग्रेजी के 'U' आकार का मोड़ लेती है और भारत के अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है। इस मोड़ के कारण यहां दुनिया की सबसे गहरी घाटियों में से एक ‘यरलुंग त्संगपो महान घाटी’ का निर्माण होता है।
चोटी पर चढ़ना है बहुत मुश्किल
कठिन मौसम और तीखे ढलानों के कारण लंबे समय तक इस चोटी पर चढ़ना लगभग असंभव माना जाता था। 1970 के दशक तक यह दुनिया की सबसे ऊंची ऐसी चोटी थी, जिस पर किसी ने फतह हासिल नहीं की थी। आखिरकार वर्ष 1992 में एक चीनी-जापानी संयुक्त पर्वतारोही दल ने इस पर पहली बार सफलतापूर्वक चढ़ाई की।
चोटी का सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्त्व
तिब्बती बौद्ध संस्कृति में नमचा बरवा को एक पवित्र पर्वत माना जाता है। अधिक ऊंचाई और गहरी घाटी के के कारण यहां जैव विविधता का एक अनूठा पारिस्थितिकी तंत्र पाया जाता है, जहां बर्फ से ढके शिखरों से लेकर डेंस बारिश वाले जंगल तक का नजारा एक ही एरिया में देखने को मिलता है। नमचा बरवा न केवल हिमालय की सबसे पूर्वी सीमा तय करती है, बल्कि ब्रह्मपुत्र नदी के भारत प्रवेश मार्ग का प्राकृतिक इंट्री गेट भी है।
