उत्तर प्रदेश का भूगोल उठाकर देखें, तो यह कुल 240,928 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह देश का सबसे अधिक जिले वाला राज्य भी है, जहां कुल 75 जिले कुल 18 मंडलों में आते हैं। इन सभी जिलों की अपनी-अपनी विशेषताए हैं, जिस वजह से इन जिलों को उनके मूल नाम के अलावा उपनाम से भी जाना जाता है।
इस कड़ी में यहां एक जिला ऐसा भी है, जिसे ‘टिकुली’ का शहर भी कहा जाता है। खास बात यह है कि यह जिला यूपी सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना में भी शामिल है। कौन-सा है यह जिला, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
क्या होती है ‘टिकुली’
सबसे पहले हम टिकुली के बारे में जान लेते हैं। आपको बता दें कि माथे पर लगाने वाली बिंदी को टिकुली कहा जाता है। दरअसल, टिकुली एक पारंपरिक कला है, जिसकी शुरुआत बिहार से मानी जाती है।
पहले यह पिघले हुए कांच पर बनाई जाती थी, लेकिन आजकल इसे बोर्ड या लकड़ी पर इनेमल पेंट और बारीक कूची से बहुत आकर्षक डिजाइनों में तैयार किया जाता है। अब इसका उपयोग केवल माथे की बिंदी के रूप में नहीं, बल्कि दीवार चित्रों, थालियों, कोस्टर और अन्य सजावटी सामानों के लिए किया जाता है।
किस जिले को कहते हैं ‘टिकुली’ का शहर
उत्तर प्रदेश राज्य के बलिया जिले को मुख्य रूप से ‘टिकुली’ यानि कि बिंदी के लिए जाना जाता है। यह एक कुटीर उद्योग होने के साथ-साथ महिलाओं की आजीविका और उत्तर प्रदेश सरकार की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना है।
क्यों कहा जाता है ‘टिकुली’ का शहर
यूपी के बलिया के मनियर एरिया और इसके आसपास के कई गांवों में लंबे समय से बिंदी निर्माण हो रहा है। यहां 1970 के दशक से पहले कांच की बिंदियां बनती थीं। हालांकि, आज के समय में यहां मखमली, स्टोन, मोतियों और धागों से सजी कई प्रकार की फैंसी और पारंपरिक बिंदियां तैयार की जाती हैं।
ODOP में क्यों शामिल हुई‘टिकुली’
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बलिया जिले की पहचान को बढ़ावा देने के लिए बिंदी यानि टिकुली को 'एक जिला एक उत्पाद' (One District One Product) योजना के तहत चुना गया है। इस योजना के माध्यम से यहां के बिंदी उद्योग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है।
बलिया की महिलाओं को मिला है रोजगार
बिंदी निर्माण की वजह से बलिया की महिलाओं को रोजगार मिला है। यहां के ग्रामीण परिवेश की महिलाओं के लिए बिंदी निर्माण क्षेत्र से जुड़कर आर्थिक स्वावलंबन का मुख्य आधार तैयार हुआ है। आज यहां पर हजारों महिला स्वयं सहायता समूह अपने घरों से बिंदी काटने, कार्ड पर चिपकाने और सजावट का काम करती हैं।
देश-विदेश में रहती है मांग
बलिया में तैयार की जाने वाली बिंदियों की मांग उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, मुंबई, सूरत और अन्य महानगरों में रहती है। इसके अलावा यहां की बिंदियों को नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में भी भेजा जाता है।
यूपी का सबसे पूर्वी जिला है बलिया
उत्तर प्रदेश का बलिया जिला, यूपी का सबसे पूर्वी जिला है। प्रदेश का सबसे उत्तरी जिला सहारनपुर, सबसे पश्चिमी जिला शामली और सबसे दक्षिणी जिला सोनभद्र है। यूपी देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है और आबादी में यह देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य गिना जाता है।
क्योंकि, साल 2011 में यहां की आबादी 19 करोड़ 98 लाख 12 हजार 341 दर्ज की गई थी, जो कि अब बढ़कर 24 से 25 करोड़ होने का अनुमान है।
