उत्तर प्रदेश की पहली वाइल्डलाइफ सेंचुरी कौन-सी है, जानें यहां

Last Updated: Sep 29, 2026, 18:39 IST

उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हमें अलग-अलग वाइल्डलाइफ सेंचुरी देखने को मिलती हैं। ये सेंचुरी विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों का घर है। इस कड़ी में क्या आप जानते हैं कि यूपी की पहली वाइल्डलाइफ सेंचुरी कौन-सी है ? यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।

वाइल्डलाइफ सेंचुरी
वाइल्डलाइफ सेंचुरी

उत्तर प्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है, जो कि अपनी विविध संस्कृति के लिए जाना जाता है। इसके साथ ही यह अपनी जैव विविधता के लिए भी उतना ही प्रसिद्ध है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हमें अलग-अलग वाइल्डलाइफ सेंचुरी देखने को मिलती हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश की पहली वाइल्डलाइफ सेंचुरी कौन-सी है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।  

उत्तर प्रदेश की पहली वाइल्डलाइफ सेंचुरी

उत्तर प्रदेश की पहली वाइल्डलाइफ सेंचुरी यानि वन्यजीव अभयारण्य चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य है। इस अभयारण्य की स्थापना 1957 में उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले (तत्कालीन वाराणसी जिले का हिस्सा) में की गई थी। यह विंध्य पर्वत रेंज के बीच प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और अनूठी जैव विविधता का केंद्र है।

सेंचुरी में हुआ एशियाई शेरों का ऐतिहासिक प्रयोग

चंद्रप्रभा सेंचुरी का गठन मुख्य रूप से एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए किया गया था। 1957 में तत्कालीन सरकार ने गुजरात के गिर नेशनल पार्क से एक एशियाई शेर और दो शेरनियों को लाकर यहां बसाया था। शुरुआत में शेरों की आबादी बढ़कर 11 तक पहुंच गई थी। हालांकि, बाद के वर्षों में अवैध शिकार और उचित प्रबंधन की कमी के कारण ये शेर यहां से विलुप्त हो गए, लेकिन इसने उत्तर प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की नींव रख दी।

भौगोलिक विस्तार और प्राकृतिक सुंदरता

चंद्रप्रभा वाइल्डलाइफ सेंचुरी लगभग 78 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यह वाराणसी शहर से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित है। यह सेंचुरी अपने प्राकृतिक झरनों के लिए पूरे राज्य में प्रसिद्ध है। यहां के कुछ प्रमुख झरनें और नदी इस  प्रकार हैंः 

देवदरी : राजदरी के पास ही स्थित एक और खूबसूरत झरना।

चंद्रप्रभा नदी: यह नदी इस अभयारण्य के बीच से होकर बहती है, जो यहां के वन्यजीवों के लिए पानी का मुख्य स्रोत है।

सेंचुरी की वनस्पति और जीव-जंतु 

शेरों के विलुप्त होने के बाद भी यह सेंचुरी विविध प्रकार के वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। यहां तेंदुए, चित्तीदार हिरण, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर, चिंकारा और लकड़बग्घे पाए जाते हैं। यहां कई प्रकार के देशी और प्रवासी पक्षियों के साथ-साथ विभिन्न प्रजातियों के अजगर और सांप भी पाए जाते हैं। यह क्षेत्र मुख्य रूप से Dry Deciduous Forests से ढका हुआ है, जहां सागौन, महुआ, अमलतास और तेंदू के पेड़ मिलते हैं।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Sep 29, 2026, 18:39 IST

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