उत्तर प्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है, जो कि विविध संस्कृति और अनूठी परंपराओं वाला राज्य है। यह राज्य कुल चार संभागों में बंटा हुआ है, जिसमें बुंदेलखंड भी शामिल है। यह क्षेत्र अपने मजबूत किलों और वीरों की कहानियों के लिए जाना जाता है। वहीं, यूपी का यह इलाका खनिजों के भंडार के लिए भी प्रसिद्ध है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
यूपी के कितने जिलों में है बुंदेलखंड क्षेत्र
बुंदेलखंड क्षेत्र यूं, तो उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बंटा हुआ है। हालांकि, अकेले उत्तर प्रदेश के कुल 7 जिले बुंदेलखंड में शामिल हैं।
झांसी
यह जिला बुंदेलखंड का मुख्य सांस्कृतिक और प्रशासनिक केंद्र है।
जालौन
यह जिला पेपर उद्योग के लिए जाना जाता है और इसका मुख्यालय उरई में स्थित है।
ललितपुर
यह जिला तीन तरफ से मध्य प्रदेश से घिरा है। वहीं, यह इकलौता ऐसा जिला है, जो कि यूरेनियम के भंडार के लिए जाना जाता है।
हमीरपुर
हमीरपुर जिले में यमुना और बेतवा नदी मिलती है और यह जूतों के लिए प्रसिद्ध है।
महोबा
महोबा जिले को आल्हा-ऊदल की वीरभूमि कहा जाता है। इसके अलावा, यह जिला पान के लिए जाना जाता है।
बांदा
यह जिला केन नदी के किनारे बसा हुआ है और शजर पत्थर के लिए जाना जाता है।
चित्रकूट
इस जिले को भगवान राम की तपोभूमि कहा जाता है, जो कि एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थान है।
नोटः बुंदेलखंड क्षेत्र विंध्य पर्वत श्रृंखला के उत्तर में है, जो कि पठारी भाग पर है। यह जमीन में चट्टानें हैं, जिससे यहां की मिट्टी कम उपजाऊ है और भूजल काफी नीचे है।
बुंदेलखंड का इतिहास और संस्कृति
बुंदेलखंड के इतिहास की बात करें, तो पहले यहां चंदेल राजाओं का शासन था, जिनकी राजधानी महोबा थी। उन्होंने खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध मंदिरों का निर्माण करवाया। उस दौरान इस इलाके को ‘जेजाकभुक्ति’ कहा जाता था। बाद में ओरछा के बुंदेला राजाओं के नाम पर इस क्षेत्र का नाम 'बुंदेलखंड' हो गया। राजा छत्रसाल ने मुगलों के खिलाफ विद्रोह कर यहां आजाद बुंदेला राज्य की स्थापना की थी। वहीं, 1857 की क्रांति में रानी लक्ष्मीबाई ने यहां पर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। यहां बुंदेलखंडी भाषा बोली जाती है, जिसके लोकगीतों में आल्हा और लोकनृत्य में राई और सैरा डांस प्रसिद्ध है।
बुंदेलखंड की चुनौतियां
बुंदेलखंड की चुनौतियों में जल संकट मुख्य समस्या है। यह पथरीली जमीनी की वजह से जल स्तर नीचे है। यहां सूखा जैसी स्थिति रहती है, जिससे कृषि पर प्रभाव पड़ता है। इस एरिया में केवल उन्हीं फसलों को उगाया जाता है, जिन्हें कम पानी चाहिए होता है। जैसेः चना, मटर, मसूर और सरसों आदि।
बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से मिली नई उड़ान
बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे ने इस क्षेत्र में विकास को नई रफ्तार दी है। यह कुल 296 किलोमीटर लंबा है, जो कि चित्रकूट को सीधे इटावा के पास आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से जोड़ता है। इस एक्सप्रेस-वे ने इस पिछड़े क्षेत्र में उद्योगों के रास्ते खोल दिए हैं।
