उत्तर प्रदेश का अनोखा रेलवे स्टेशन, ऊपर से देखने पर लगता है शतरंज की बिसात

Last Updated: Oct 11, 2026, 08:33 IST

उत्तर प्रदेश में भारतीय रेलवे का बड़ा नेटवर्क है। इस कड़ी में राज्य में कई बड़े रेलवे स्टेशन बने हुए हैं। इनमें एक रेलवे स्टेशन ऐसा भी है, जो ऊपर से देखने पर शतरंज की बिसात की तरह दिखता है। 

यूपी
यूपी

भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन कहा जाता है। देश के चौथे सबसे बड़ा राज्य यानि कि उत्तर प्रदेश में रेलवे का सबसे बड़ा नेटवर्क है। इस कड़ी में यहां कई बड़े रेलवे स्टेशन बने हुए हैं, जिनमें एक अनोखा रेलवे स्टेशन ऐसा भी है, जिसे ऊपर से देखने पर वह बिल्कुल शतरंज की बिसात की तरह दिखता है। यह खूबी इसे अन्य रेलवे स्टेशनों से अलग बनाती है। कौन-सा है यह स्टेशन, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।

शतरंज की बिसात लगता है यह स्टेशन 

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित चारबाग रेलवे स्टेशन भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का एक ऐसा अनूठा और वास्तुकला का अद्भुत नमूना है, जो ऊपर से देखने पर शतरंज की बिसात जैसा दिखाई देता है। 1914 में निर्मित यह रेलवे स्टेशन अपनी सुंदरता, भव्यता और अनूठी इंजीनियरिंग के लिए जाना जाता है।

स्टेशन की है शतरंज जैसी वास्तुकला 

जब इस स्टेशन को ड्रोन, हवाई जहाज या ऊपर से देखा जाता है, तो इसकी मुख्य इमारत और उसके ऊपर बने बड़े-छोटे गुंबद और मीनारें बिल्कुल शतरंज के खेल की तरह दिखते हैं। स्टेशन के छोटे और बड़े गुंबद ऐसे लगते हैं मानो शतरंज की बिसात पर राजा, रानी, वजीर, हाथी, घोड़े और प्यादे सजाकर रखे गए हों। वहीं, लाल और सफेद रंग का अग्रभाग (Facade) और पटरियों का फैलाव इस बिसात के बोर्ड का रूप दिखाता है।

किसने बनाया था यह स्टेशन?

चारबाग स्टेशन का डिजाइन अंग्रेज वास्तुकार जे. एच. हॉर्निमैन ने तैयार किया था। इसका निर्माण मार्च 1914 में शुरू हुआ था और यह 1923 में बनकर पूरी तरह तैयार हुआ। इसे बनाने में उस समय लगभग 70 लाख रुपये की लागत आई थी। इस स्टेशन की इमारत राजस्थानी, मुगलिया और अवधी स्थापत्य कला का एक बेहतरीन संगम है।

चारबाग स्टेशन की अन्य अनोखी विशेषताएं

-इस स्टेशन की वास्तुकला की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जब आप स्टेशन के मुख्य बाहरी प्रवेश द्वार पर खड़े होते हैं, तो आपको बाहर पटरियों पर चलने वाली ट्रेनों, इंजनों की गड़गड़ाहट या सीटी का शोर सुनाई नहीं देता। इसका निर्माण इस तरह किया गया है कि आवाज अंदर ही दब जाती है।

-1916 में लखनऊ में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन के दौरान महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू की पहली मुलाकात इसी चारबाग रेलवे स्टेशन के प्रांगण में हुई थी।

-इस स्टेशन के निर्माण से पहले यहां चार खूबसूरत और बड़े बाग हुआ करते थे। इसी कारण इस पूरे क्षेत्र और स्टेशन का नाम 'चारबाग' पड़ा। लखनऊ का चारबाग स्टेशन केवल एक रेलवे स्टेशन नहीं, बल्कि भारतीय रेल के इतिहास और स्थापत्य कला का एक अनमोल रत्न माना जाता है।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

... Read More
First Published: Oct 11, 2026, 08:33 IST

आप जागरण जोश पर भारत, विश्व समाचार, खेल के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए समसामयिक सामान्य ज्ञान, सूची, जीके हिंदी और क्विज प्राप्त कर सकते है. आप यहां से कर्रेंट अफेयर्स ऐप डाउनलोड करें.

Trending

Latest Education News