दुनिया का इकलौता देश, जिसका झंडा त्रिकोणीय है, जानें यहां
आपने दुनिया के अलग-अलग देशों के झंडों के बारे में पढ़ा, सुना और देखा होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि दुनिया में इकलौता देश ऐसा भी है, जिसका झंडा आयातकार नहीं, बल्कि त्रिकोणीय है।
दुनिया में अलग-अलग देशों के अपने-अपने झंडे हैं। इन झंडों की अपनी पहचान है, जिनसे देशों की पहचान होती है। कुछ देशों के झंडे आयातकार हैं, तो कुछ देशों के झंडे वर्गाकार हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि दुनिया में इकलौता देश ऐसा भी है, जिसका झंडा न आयातकार है और न ही वर्गाकार, बल्कि यह त्रिकोणीय है। कौन-सा है यह देश, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
किस देश का झंडा त्रिकोणीय है
दुनिया का इकलौता देश, जिसका झंडा आयताकार या वर्गाकार न होकर त्रिकोणीय है, वह हमारा पड़ोसी देश नेपाल है। नेपाल का राष्ट्रीय ध्वज दो त्रिकोणों को एक के ऊपर एक जोड़कर बनाया गया है। यह दुनिया के 195 से अधिक संप्रभु देशों में एकमात्र ऐसा झंडा है, जो चार कोनों वाला नहीं है।
नेपाल के झंडे की अनूठी बनावट और आकार
नेपाल का झंडा दो समकोण त्रिभुजों को मिलाकर बना है। ऊपरी त्रिकोण में अर्धचंद्र और सूर्य का प्रतीक बना है, जबकि निचले त्रिकोण में 12 किरणों वाला चमकता हुआ सूर्य बना है। इस ध्वज के आधुनिक स्वरूप को 16 दिसंबर 1962 को नेपाल के नए संविधान के तहत आधिकारिक रूप से अपनाया गया था।
झंडे में शामिल रंगों और प्रतीकों का महत्त्व
-झंडे में शामिल गहरा लाल रंग नेपाल का राष्ट्रीय रंग है। लाल रंग बहादुर नेपाली लोगों और गोरखा सैनिकों की वीरता, साहस और विजय का प्रतीक है। इसके साथ ही यह नेपाल के राष्ट्रीय फूल गुरांश का भी प्रतीक है।
-झंडे के चारों ओर बनी नीली पट्टी शांति, सद्भाव और मित्रता का संदेश देती है।
-चंद्रमा नेपाली लोगों के शांत स्वभाव और शीतलता का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि सूर्य उनकी उग्रता और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
-यह इस विश्वास को भी दिखाता है कि जब तक आसमान में सूर्य और चंद्रमा रहेंगे, तब तक नेपाल राष्ट्र का अस्तित्व कायम रहेगा।
त्रिकोणीय आकार के पीछे का ऐतिहासिक कारण
दक्षिण एशिया और हिंदू-बौद्ध संस्कृतियों में प्राचीन काल से ही मंदिरों, किलों और राज्यों पर त्रिकोणीय ध्वज फहराने की परंपरा रही है। प्राचीन भारत और नेपाल में राजे-रजवाड़े आयताकार के बजाय त्रिकोणीय झंडे ही इस्तेमाल करते थे। जब आधुनिक काल में दुनिया के अन्य देशों ने पश्चिमी शैली के आयताकार झंडों को अपनाया, तब नेपाल ने अपनी सदियों पुरानी सांस्कृतिक और वैदिक परंपरा को कायम रखते हुए अपने त्रिकोणीय ध्वज को बरकरार रखा।
दुनिया का सबसे गणितीय झंडा
नेपाल के झंडे की एक और अनोखी बात यह है कि इसका निर्माण पूरी तरह से ज्यामितीय नियमों पर आधारित है। नेपाल के संविधान की धारा 8 (अनुसूची 1) में इस झंडे को स्केल और कंपास की मदद से सटीक अनुपात में बनाने की पूरी गणितीय विधि के बारे में बताया गया है।
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