जो आज आप पर सवाल उठाते हैं, कल वही आपकी सफलता की मिसाल देंगे; बस अपने लक्ष्य पर डटे रहो क्योंकि जो मेहनत करते हैं। वहीं आगे भी बढ़ते हैं। इन लाइन को हम सुष्मिता शर्मा को समर्पित कर रहे हैं। हम ऐसा क्यों कह रहे हैं। यह आपको नीचे पढ़ते हुए समझ में आ जाएगा। सुष्मिता ने सिर्फ एक पद हासिल नहीं किया, बल्कि उन्होंने एक रूढ़ीवादी सोच को तोड़ा है। बचपन से ही उन्हें यही सुनना पड़ा कि उनका भविष्य केवल शादी और घर के कामों में है। वह बताती हैं कि शादी के लिए मना करने पर लोग अक्सर तंज कसते थे। रिश्तेदार और आसपास के लोग ताने देकर कहते थे कि ‘पढ़-लिखकर क्या कर लेंगी, बेहतर होगा कि वे बर्तन मांजने और घर के काम सीखें। लड़कियों की नौकरी का इंतजार कौन करता है।’ इन्हीं तानों को सुष्मिता ने अपनी ढाल बनाया और SSC CGL की परीक्षा पास की और ASO का पद हासिल किया। आइए सुष्मिता की सफलता की कहानी के बारे में जानें।
आखिर कौन है सुष्मिता शर्मा?
सुष्मिता शर्मा एक मिडिकल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखती है। वह ऐसे समाज से आती है, जहां लड़कियों को पढ़ाना और नौकरी कराना अच्छा नहीं माना जाता। वह एक इंटरव्यू में बताती हैं कि उनके 18 साल की उम्र में उनकी शादी तय कर दी गई थी और इस दौरान काॅलेज के पहले साल में थी। बिना उनकी राय लिए रिश्ते की बात आगे बढ़ा दी गई थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने सपने पूरे करने के लिए 3 से 4 साल का वक्त मांगा और आज जिसका रिजल्ट हम सभी के सामने हैं। सुष्मिता फिलहाल सेंट्रल सेक्रेटेरियट सर्विसेज में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) के पद पर पोस्टेड है।
सुष्मिता पहली बार में नहीं हुई सफल
सुष्मिता शर्मा के लिए असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर बनना इतना आसान नहीं था। उन्हें पहली बार में सफलता नहीं मिली। शादी के दबाव के बीच सुष्मिता लाइब्रेरी में रोजाना 8 से 10 घंटे की पढ़ाई करती थी। SSC मेन्स एग्जाम से ठीक 1 महीने पहले उन्हें किडनी स्टोन का दर्द हुआ और ऑपरेशन की नौबत आ गई।शारीरिक पीड़ा और परीक्षा के मानसिक तनाव के बीच उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी गलतियों से सीखती रही और आगे बढ़ती रहीं। सुष्मिता अपनी इस सफलता के बारे में कहना है कि हमें जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए। सफलता एक न एक दिन आपके कदम जरूर चूमेगी।
