भारत के इस राज्य में मिला 50 टन सोने का भंडार! जल्द बन सकता है देश का सबसे बड़ा गोल्ड सप्लायर

आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के जोन्नागिरी क्षेत्र में विशाल सोने का भंडार मिला है. अधिकारियों के अनुसार, अकेले जोन्नागिरी में ही करीब 50 टन सोने का भंडार मौजूद हो सकता है।  

Jun 20, 2026, 17:04 IST
एक टन मिट्टी से निकलता है सिर्फ 1 ग्राम गोल्ड
एक टन मिट्टी से निकलता है सिर्फ 1 ग्राम गोल्ड

आंध्र प्रदेश की धरती में छिपा है सोने का बड़ा खजाना! कुरनूल जिले के जोन्नागिरी क्षेत्र में विशाल सोने का भंडार मिलने के बाद राज्य के भारत का नया "गोल्ड हब" बनने की उम्मीदें बढ़ गई है. अधिकारियों के अनुसार, अकेले जोन्नागिरी में ही करीब 50 टन सोने का भंडार मौजूद हो सकता है। यदि अनुमान सही साबित होते हैं, तो आने वाले वर्षों में आंध्र प्रदेश देश का सबसे बड़ा सोना आपूर्तिकर्ता राज्य बन सकता है।

जोन्नागिरी में मिला सोने का खजाना 

आंध्र प्रदेश के माइंस विभाग के प्रधान सचिव मुकेश कुमार मीणा ने बताया कि अब तक हुए सर्वेक्षणों के आधार पर जोन्नागिरी क्षेत्र में लगभग 50 टन सोने के भंडार का अनुमान लगाया गया है। यहां व्यावसायिक स्तर पर सोने का उत्पादन भी शुरू हो चुका है, जिससे राज्य की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि यदि आगे की खोजों में भी इसी तरह के परिणाम मिलते हैं, तो आंध्र प्रदेश देश का सबसे बड़ा सोना उत्पादक राज्य बन सकता है।

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आजादी के बाद पहली बड़ी निजी गोल्ड माइन

जोन्नागिरी प्रोजेक्ट को भारत की आजादी के बाद स्थापित होने वाली पहली बड़ी निजी गोल्ड माइन माना जा रहा है। इस परियोजना को Geomysore Services India Pvt Ltd विकसित कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की सोने के आयात पर निर्भरता कम हो सकती है और घरेलू उत्पादन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। 

अभी सिर्फ एक-तिहाई इलाके की हुई जांच

जोन्नागिरी में खनन के लिए करीब 1,500 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन अब तक केवल 500 एकड़ क्षेत्र में ही विस्तृत खोज का काम हुआ है। इसी क्षेत्र में करीब 13 टन सोने की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। वहीं अधिकारियों का मानना है कि बाकी 1,000 एकड़ में खोज पूरी होने के बाद कुल भंडार 50 टन तक पहुंच सकता है। 

चार और इलाके रडार पर

जोन्नागिरी के अलावा राज्य सरकार ने सोने के खनन के लिए चार अन्य संभावित क्षेत्रों की भी पहचान की है। इनमें रामागिरी, जव्वकुला और चिगुरुकुंटा बिस्नाटम जैसे इलाके शामिल हैं। इन स्थानों पर भी सर्वे और खोज का काम आगे बढ़ाया जाएगा।

एक टन मिट्टी से निकलता है सिर्फ 1 ग्राम गोल्ड  

सोना निकालना जितना सुनने में रोमांचक लगता है, असल में यह उतना ही मुश्किल और महंगा कार्य होता है। मुकेश कुमार मीणा के अनुसार, पहले एक टन खनन सामग्री से लगभग 3 ग्राम सोना मिल जाता था, लेकिन अब यह घटकर करीब 1 ग्राम प्रति टन रह गया है।

यानी एक ग्राम सोना निकालने के लिए भारी मात्रा में चट्टानों और मिट्टी की प्रोसेसिंग करनी पड़ती है। यही वजह है कि गोल्ड माइनिंग में अत्याधुनिक तकनीक और बड़े निवेश की जरूरत होती है। 

सीएम करेंगे प्रोजेक्ट का शुभारंभ  

राज्य सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू इसी महीने जोन्नागिरी गोल्ड माइनिंग परियोजना का औपचारिक शुभारंभ कर सकते हैं। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ आंध्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ताकत देगा।

क्यों खास है इस भंडार की खोज?

जोन्नागिरी में 50 टन तक सोने के भंडार का अनुमान

भारत की पहली बड़ी निजी गोल्ड माइन परियोजनाओं में शामिल

चार अन्य संभावित गोल्ड माइनिंग क्षेत्रों की पहचान

घरेलू सोना उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता घट सकती है

आंध्र प्रदेश देश का सबसे बड़ा सोना सप्लायर बनने की ओर अग्रसर

यह खोज भारत के खनन क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है और आने वाले वर्षों में देश के गोल्ड सेक्टर की तस्वीर बदल सकती है। 

Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

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