बूढ़ी गंडक नदी इन दिनों चर्चाओं में बनी हुई है। क्योंकि, नदी में जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की सूचना है, जिससे नेपाल के गोरखा जिले में कई पुल बह गए और कुछ लोगों के लापता होने की भी सूचना है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि बूढ़ी गंडक नदी कहां से निकलती है और इसका पूरा रूट क्या है? यदि आप नहीं जानते हैं, तो इस लेख के माध्यम से हम बूढ़ी गंडक नदी के बारे में विस्तार से जानेंगे।
कहां से निकलती है बूढ़ी गंडक नदी
बूढ़ी गंडक उत्तर बिहार की एक प्रमुख नदी है और गंगा नदी की एक महत्त्वपूर्ण सहायक नदी है। इस नदी का उद्गम नेपाल की सीमा के पास बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में सोमेश्वर पहाड़ियों के पश्चिमी भाग में स्थित चौतरवा चौर से होता है। आपको बता दें कि अपने उद्गम स्थल से लेकर मुजफ्फरपुर जिले तक, इस नदी के ऊपरी हिस्से को स्थानीय स्तर पर 'सिकरहना' नदी के नाम से जाना जाता है।
कितनी है नदी की लंबाई
यह नदी पूरी तरह से भारत विशेषकर बिहार में ही बहती है। इसकी कुल लंबाई लगभग 320 किलोमीटर है। यह नदी पश्चिमी चंपारण से निकलकर पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और बेगूसराय जिलों से होकर बहती है।
गंगा में होता है संगम
बूढ़ गंडक नदी आखिर में खगड़िया जिले के पास गंगा नदी में मिल जाती है। समस्तीपुर और खगड़िया जैसे प्रमुख शहर इसी नदी के किनारे बसे हैं।
क्यों कहते हैं 'बूढ़ी गंडक'
अब हम बूढ़ी गंडक के नाम के पीछे का कारण जान लेते हैं। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि यह नदी वास्तव में मुख्य 'गंडक नदी' का ही एक पुराना या छोड़ा हुआ मार्ग है। सदियों पहले जब मुख्य गंडक नदी ने पश्चिम की ओर अपना रास्ता बदल लिया, तो उसके छोड़े गए पुराने रास्ते पर बहने वाली जलधारा को 'बूढ़ी गंडक' कहा जाने लगा। यह नदी मुख्य गंडक नदी के समानांतर ही बहती है।
बूढ़ी गंडक की प्रमुख सहायक नदियां
इस नदी में मुख्य रूप से हिमालय से निकलने वाली कई छोटी-बड़ी जलधाराएं मिलती हैं। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में मसान, बालोर, पण्डई, सिकटी, धनौती, डंडा और टियूर शामिल हैं।
बूढ़ी गंडक का भौगोलिक और आर्थिक महत्त्व
बूढ़ी गंडक अपने साथ भारी मात्रा में उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी लाती है। यह मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और बेगूसराय के इलाकों को कृषि के लिए बेहद उपजाऊ बनाती है, जहां धान, गन्ना, मक्का और गेहूं की बंपर खेती होती है।
