भारत में आपने बहुत से मकबरों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। इसमें विश्व प्रसिद्ध ताज महल भी शामिल है, जो कि एक मकबरा है। हालांकि, क्या आप भारत का पहले इस्लामी मकबरे के बारे में जानते हैं ? यह मकबरा नई दिल्ली इलाके में बना हुआ है, जहां आज भी लोग इस मकबरे को करीब से देखने के लिए पहुंचते हैं।
क्योंंकि, यह वह मकबरा है, जिसने भारत में मकबरों के वास्तुकला की नींव रखी थी, जिसे अपनाकर मुगल काल में कई भव्य और बड़े मकबरों का निर्माण करवाया गया। कौन-सा है यह मकबरा और क्या है इसका इतिहास, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
भारत का पहला इस्लामिक मकबरा
भारत का पहला ऐतिहासिक इस्लामिक मकबरा सुल्तान गढ़ी का मकबरा है। यह मकबरा दिखने में सिर्फ मकबरा नहीं लगता है, बल्कि यह एक किले की तरह दिखता है, जो कि नई दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में स्थित है। आज भी लोग यहां पर्यटन और धार्मिक सद्भाव से पहुंचते हैं।
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कब और किसने करवाया था निर्माण
भारत का पहले इस्लामिक मकबरे का निर्माण गुलाम वंश के सुल्तान रहे शम्सुद्दीन इल्तुतमिश ने 1231 ईस्वी में करवाया था। उन्होंने इस किले का निर्माण अपने बड़े बेटे की याद में करवाया था, जिसकी असमय मृत्यु हो गई थी।
नासिर-उद-दीन महमूद की याद में बना है मकबरा
इल्तुतमिश का बड़ा बेटा नासिर-उद-दीन बंगाल का गवर्नर हुआ करता था, लेकिन उसकी असमय मृत्यु हो गई थी, जिससे दिल्ली का सुल्तान बहुत दुख में डूब गया था। उसने अपने बेटे की याद में एक मकबरा बनवाने का निर्णय लिया और भारत के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया।
क्या होता है सुल्तान गढ़ी का अर्थ
अब हम सुल्तान गढ़ी का अर्थ समझ लेते हैं। दरअसल, गढ़ी का अर्थ ‘गुफा’ होता है। यहां सुल्तान की कब्र जमीन के नीचे बने एक तहखाने में बनी हुई है, जिस वजह से इसे सुल्तान गढ़ी कहा जाता है।
इसका पूरा अर्थ ‘गुफा का राजा’ हुआ। यह तहखाना 8 कोनों वाला कमरा है, जहां तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां जाती हैं। इस मकबरे में हिंदू-इस्लामी कला का मिश्रण देखने को मिलता है। आज भी इस मकबरे को देखा जा सकता है, जो कि कुतुब मीनार से करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
