दुनिया के अलग-अलग देशों के पास अपने लिखित संविधान मौजूद हैं। इनमें कुछ संविधान बहुत ही बड़े हैं, जबकि कुछ संविधान बहुत छोटे हैं। इस कड़ी में दुनिया के एक देश का संविधान बहुत छोटा है, जिसे सबसे छोटा लिखित संविधान कहा जाता है। कौन-सा है यह देश और किस प्रकार है सबसे छोटा लिखित संविधान, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
सबसे छोटा लिखित संविधान
दुनिया का सबसे छोटा लिखित संविधान मोनाको देश का है। शब्दों की संख्या के आधार पर यूरोप महाद्वीप के इस देश का संविधान सबसे छोटा है। आपको बता दें कि वेटिकन सिटी के बाद मोनाको दुनिया का दूसरा सबसे छोटा देश है। इसका संविधान 17 दिसंबर 1962को अपनाया गया था।
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संविधान में कितने अनुच्छेद और चैप्टर
मोनाको के संविधान में कुल 12 अध्याय और 97 अनुच्छे दिए गए हैं। इन सभी में सिर्फ 3,814 शब्द लिखे हुए हैं, जिसे कोई भी व्यक्ति सिर्फ कुछ मिनटों में ही पढ़ सकता है। मोनाको में देश का प्रमुख प्रिंस होता है, लेकिन कानून बनाने का काम संसद ही करती है।
कुछ मायनों में USA का आता है नाम
कई बार सबसे छोटा लिखित संविधान के तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका का नाम आता है। दरअसल, यूएसए का संविधान सबसे पुराना है। इसके मूल संविधान में लिखित शब्दों की संख्या 4,543 है, वहीं संशोधनों को मिलाकर यह 7,000 से अधिक है।
इस संविधान में मूल रूप से 7 अनुच्छेद हैं। यह दुनिया का पहला लिखित संविधान है, जिसे 1787 में तैयार किया कर 1789 में लागू किया गया था। अमेरिका के संविधान में केंद्र की शक्तियों और नागरिकों के मूल अधिकारों की बात कही गई है। इसके अलावा बाकी नियम राज्यों के अपने संविधान के पास हैं।
दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान
यह बात हम सभी जानते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान भारत के पास है, जिसे बनने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन लगे थे। हमारे देश के मूल संविधान में 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थीं, जो कि मौजूदा समय में संशोधनों के बाद 470 से अधिक अनुच्छेद और 12 अनुसूचियों में बदल चुकी हैं।
हमारे संविधान में कुल शब्द की संख्या की बात करें, तो इनकी संख्या 1,46,000 से अधिक है। वहीं, संविधान को 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया था। आपको बता दें कि संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को हुई थी।
