भारत में कई नदियों का प्रवाह होता है, जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इस कड़ी में भारत में एक नदी ऐसी भी है, जो कि सिर्फ 1 नाम से नहीं, बल्कि 4 नामों से जानी जाती है। खास बात यह है कि यह नदी हर राज्य के हिसाब से अपना नाम बदल लेती है। ऐसे में यह उत्तराखंड से निकलने के बाद बिहार तक पहुंचते-पहुंचते कई अलग-अलग नामों से जानी जाती है।
वह नदी, जो 4 बार बदलती है नाम
भारत में 4 बार नाम बदलने को लेकर काली नदी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। यह नदी पिथौरागढ़ जिले के कालापानी/लिपुलेख के पास से निकलती है, तब इसे काली नदीकहा जाता है। यह नदी भारत और नेपाल की प्राकृतिक सीमा भी बनाती है।
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टनकपुर में बदलती है नाम
काली नदी जैसे ही टनकपुर के मैदानी इलाकों में पहुंचती है, तो इसे शारदा नदी के नाम से जाना जाता है।
उत्तर प्रदेश में 2 बार बदलती है नाम
काली नदी जैसे ही उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है, तो यह 2 बार अपना नाम बदलती है। यूपी में प्रवेश करने और करनाली नदी से मिलने के बाद इसे घाघरा कहा जाता है। लेकिन, जैसे ही यह अयोध्या से होकर गुजरती है, तो इसे सरयू नदीकहा जाता है।
बिहार में इस नाम से जानी जाती है यह नदी
बिहार में यह नदी छपरा के पास गंगा नदी में मिलने से पहले घाघरा और सरयू के नाम से जानी जाती है।
ब्रह्मपुत्र नदी के भी हैं 4 नाम
ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत से निकलकर भारत के दो राज्यों और बांग्लादेश में बहती है और हर जगह इसका नाम बदल जाता है। तिब्बत में इसे यर्लांग त्सांगपोकहा जाता है, जबकि भारत में प्रवेश करते ही अरुणाचल प्रदेश के लोग इसे सियांग या दिहांगनदी कहते हैं। वहीं, जब दिहांग नदी में दिबांग और लोहित नदियां आकर मिलती हैं, तब असम के मैदानों में इसे ब्रह्मपुत्र का नाम मिलता है। बीते दिनों इस नदी ने ही असम में भारी तबाही मचाई थी। आपको बता दें कि बांग्लादेश की सीमा में प्रवेश करते ही इसका नाम जमुनाहो जाता है।
