भारतीय पुलिस और सुरक्षा बलों के पास एक लाठी जरूरी होती है, जिसका इस्तेमाल सुरक्षा के लिहाज से किया जाता है। वर्तमान में लाठियों की जगह फाइबर ने ले ली है। हालांकि, आज भी पारंपरिक रूप से इन लाठियों को बनाया और उपयोग किया जाता है। लाठियों का निर्माण बांस से किया जाता है, जिनमें 'नारगट बांस'ही मानक पुलिस लाठी की पहचान है। क्या है इसके पीछे का कारण ? जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
पुलिस लाठी के लिए बांस ही क्यों ?
पुलिस प्रशासन में लाठी के लिए किसी सामान्य लकड़ी के बजाय बांस का चयन करने के पीछे वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण हैंः
बांस का लचीलापन
बांस अपने लचीलापन के लिए जाना जाता है। जब भी पुलिस बल द्वारा लाठीचार्ज किया जाता है, तो बांस की लाठी से तेज मार होने पर भी वह आसानी से टूटती नहीं है।
मार में होती है असरदार
कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए लाठी का मुख्य उद्देश्य भीड़ को तितर-बितर करना और डराना होता है। ठोस लकड़ी की लाठी हड्डी तोड़ सकती है या जानलेवा साबित हो सकती है, जबकि बांस की लाठी मारने से तेज दर्द होता है, लेकिन जानलेवा चोट नहीं लगती है।
वजन में होती है हल्की
सामान्य लकड़ी की तुलना में बांस वजन में हल्का होता है। ऐसे में पुलिसकर्मियों द्वारा इसे आसानी से लंबे समय तक संभाला जा सकता है।
इस बांस से बनती है लाठी
पुलिस बल में इस्तेमाल होने वाली लाठी 'कठ बांस' या 'लाठी बांस' से तैयार की जाती है। यह बांस अंदर से पूरी तरह ठोस होता है।
तेल में डुबाई जाती है लाठी
जंगलों से बांस को छांटने के बाद इसे कई दिनों तक सरसों के तेल में डुबोकर रखा जाता है। लाठी को तेल पिलाने के बाद इस पर आग का सेंक लगाया जाता है, जिससे इसके अंदर की नमी खत्म हो सके और यह एकदम सख्त बन जाती है। वहीं, लाठी के निचले हिस्से पर एक मेटल की कैप लगाई जाती है, जिससे जमीन पर लगने से बांस फटता नहीं है।
जेलों में तैयार होती है लाठी
पुलिस बल की इन लाठियों को कई राज्यों की केंद्रीय जेलों में तैयार किया जाता है। इन जेलों में कैदियों द्वारा लाठी का निर्माण किया जाता है। वहीं, यूपी के विभिन्न इलाकों में भी स्थानीय कारीगरों द्वारा लाठी को तैयार किया जाता है।
