भारतीय संविधान में मूल रूप से कुल 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनूसचियां हैं। हालांकि, कुछ संशोधनों के बाद अब कुल अनुच्छेदों की संख्या बढ़कर 470 से अधिक हो गई है। इन अनुच्छेदों में एक अनुच्छेद ऐसा भी है, जिसे मृत पत्र भी कहा जाता है। खास बात यह है कि समय के साथ इसका उपयोग इतना हुआ कि बाद में सुप्रीम कोर्ट को इस पर नियंत्रण करना पड़ा। यह अनुच्छेद 356 है, जो कि राष्ट्रपति शासन से संबंधित है। इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे।
क्या है अनुच्छेद 356
भारतीय संविधान में लिखित अनुच्छेद 356 केंद्र सरकार को किसी भी राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राष्ट्रपति शासन लगाने का अधिकार देता है। इससे संबंधि राज्य पर प्रशासनिक रूप से केंद्र सरकार का अधिकार हो जाता है।
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किसने कहा था मृत पत्र
संविधान के अनुच्छेद 356 को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा डेड लेटर कहा गया था। दरअसल, यह संविधान सभा की बहस में कहा गया एक शब्द था, जो कि बाद में इस अनुच्छेद क पहचान बन गया।
क्यों कहा था डेड लेटर
साल 1949 में 19 अगस्त को संविधान सभा की बहस चल रही थी। इस दौरान कई सदस्यों ने चिंता जताते हुए कहा था कि भविष्य में केंद्र सरकार इस कानून का दुरुपयोग कर राज्यों की चुनी हुई सरकारों को अपने हिसाब से गिरा सकती हैं। ऐसे में इसका जवाब देते हुए डॉ. अंबेडकर ने कहा था कि इस तरह के प्रावधान कभी नहीं उपयोग होंगे और यह एक डेड लेटर की तरह ही रहेगा। यदि भविष्य में इसका उपयोग भी किया जाता है, तो राष्ट्रपति को यह ध्यान रखना होगा कि यह केवल अंतिम विकल्प के रूप में हो, जब सभी उपाय फेल हो जाए।
आजादी के बाद कई बार हुआ उपयोग
राष्ट्रपति शासन का उपयोग भारत में आजादी के बाद कई बार हुआ है। यह अलग-अलग राज्यों में 100 से अधिक बार इस्तेमाल किया जा चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने किया नियंत्रित
इस अनुच्छेद के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए 1994 में सुप्रीम कोर्ट में एस. आर. बोम्मई मामले पर फैसले पर आया। फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह मनमाना नहीं हो सकता है, बल्कि यह न्यायिक समीक्षा के अधीन है। यदि सरकार द्वारा गलत इरादे से राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है, तो कोर्ट संबंधित राज्य की सरकार को दोबारा से बहाल कर सकती है।
क्यों जरूरी है यह लेख
UPSC समेत विभिन्न परीक्षाओं में अनुच्छेद 356 से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। ऐसे में यह लेख बहुत ही उपयोगी है।
