उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित प्रमुख राज्यों में से एक है। भारत का यह राज्य अपनी विविध संस्कृति के लिए जाना जाता है, जिनमें नदियों की भी अहम भागीदारी है। इस कड़ी में यहां कई नदियों का प्रवाह होता है। ये नदियां प्रदेश में अलग-अलग नामों से जानी जाती हैं।
इस कड़ी में यहां एक नदी ऐसी भी है, जो उत्तर प्रदेश में 3 बार अपना नाम बदलती है। कौन-सी है यह नदी और किन जिलों से होता है नदी का प्रवाह, जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें।
यूपी में 3 बार नाम बदलने वाली नदी
उत्तर प्रदेश में काली नदी, वह नदी है, जो कि 3 बार अपना नाम बदलती है। यह नदी राज्य की सीमाओं में प्रवेश करने के बाद आगे बढ़ने पर अलग-अलग नामों से जानी जाती है।
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कब बदलती है पहली बार नाम
काली नदी उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से निकलती है और नेपाल सीमा के साथ बहते हुए 'काली नदी' कहलाती है। जैसे ही यह नदी उत्तराखंड के टनकपुर को पार करके उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में प्रवेश करती है, इसका नाम बदलकर 'शारदा नदी'हो जाता है।
कब बदलती है दूसरी बार नाम
शारदा नदी जब लखीमपुर खीरी और सीतापुर होते हुए आगे बढ़ती है, तो बहराइच के पास यह कर्णाली यानि घाघरा नदी में मिल जाती है। यहां से इसे 'घाघरा नदी'कहा जाता है।
तीसरी बार यहां बदलती है नाम
यही घाघरा नदी जब उत्तर प्रदेश में अयोध्या पहुंचती है, तो स्थानीय रूप से और धार्मिक संदर्भ में इसे 'सरयू नदी' के नाम से पुकारा जाता है। ऐसे में यह नदी यूपी में बहते हुए 3 बार अपना नाम बदलती है और स्थानीय लोग इसे अलग-अलग नामों से पुकारते हैं।
यूपी से बिहार में करती है प्रवेश
घाघरा या सरयू नदी अयोध्या, गोंडा, बस्ती, देवरिया और बलिया जिलों से बहते हुए उत्तर प्रदेश से बाहर निकलकर बिहार के छपरा के पास गंगा नदी में मिल जाती है। यही वजह है कि इस नदी को गंगा की प्रमुख सहायक नदी भी कहा जाता है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि उत्तर प्रदेश में एक और छोटी नदी है, जिसे 'पश्चिमी काली नदी' कहा जाता है। वह मुजफ्फरनगर और मेरठ से होकर बहती है और हिंडन व गंगा की सहायक नदी है।
