आपने दुनिया के अलग-अलग जल संधियों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। सभी जल संधियों की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। इस कड़ी में दुनिया में एक जल संधि ऐसी भी है, जिसे ‘आसुओं का द्वार’ भी कहा जाता है। क्या आप इस जल संधि के बारे में जानते हैं, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
किस जल संधि को कहा जाता है ‘आसुओं का द्वार’
‘आंसुओं का द्वार’ (Gate of Tears) एक बेहद महत्त्वपूर्ण समुद्री जलसंधि को कहा जाता है। इस जलसंधि का नाम 'बाब-अल-मंडेब' (Bab el-Mandeb) है। यह जलमार्ग दो महाद्वीपों एशिया और अफ्रीका को अलग करता है, इसलिए यह यमन, जिबूती और इरिट्रिया जैसे देशों की सीमाओं के बीच स्थित है।
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क्या होता है नाम का अर्थ
अरबी भाषा में 'बाब' का अर्थ होता है 'द्वार' और 'मंडेब' का अर्थ होता है 'आंसू' या 'शोक'। इसीलिए, इसे दुनिया भर में ‘आंसुओं का द्वार’ के नाम से जाना जाता है।
क्यों कहा जाता है ‘आंसुओं का द्वार’
इसके नाम के पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैंः
खतरनाक समुद्री रास्ता: ऐतिहासिक रूप से इस जलडमरूमध्य से पानी के जहाजों को गुजारना नाविकों के लिए एक बुरे सपने जैसा था। यहां समुद्र की तेज धाराएं, अचानक बदलने वाली विपरीत हवाएं और पानी के ठीक नीचे छिपी हुई नुकीली चट्टानें थीं। पुराने समय में नेविगेशन तकनीक न होने के कारण अनगिनत जहाज यहां दुर्घटनाग्रस्त होकर डूब गए और हजारों नाविकों की जान गई। जब भी नाविक इस रास्ते से गुजरने वाले होते थे, तो उनके परिवार वाले उनकी सलामती की चिंता में रोते थे और शोक मनाते थे।
पुरानी पौराणिक कथाएं: एक पुरानी अरबी किंवदंती के अनुसार, हजारों साल पहले एक भयंकर भूकंप आया था, जिसने एशिया और अफ्रीका महाद्वीप को एक-दूसरे से अलग कर दिया। इस भूकंप और उसके बाद आई बाढ़ में लाखों लोग डूबकर मर गए थे। उन मृत लोगों के शोक और उनके परिजनों के आंसुओं की याद में ही इस जलमार्ग को यह नाम दिया गया।
व्यापार के लिए है प्रमुख
यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। भूमध्य सागर से स्वेज नहर (Suez Canal) होते हुए जो भी जहाज भारत या एशिया की तरफ आते हैं, उन्हें इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। दुनिया का लगभग 10 फीसदी से अधिक समुद्री व्यापार और लाखों बैरल कच्चा तेल रोजाना इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। अगर यह रास्ता कुछ दिनों के लिए भी बंद हो जाए, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल और सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं।
