उत्तर प्रदेश के वे 2 जिले, जिनका भगवान बुद्ध के ऊपर है नाम
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जो कि अपनी अलग-अलग विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं। इस कड़ी में क्या आप जानते हैं कि यूपी के वे 2 जिले कौन-से हैं, जिनका नाम भगवान बुद्ध के नाम पर है। इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे।
उत्तर प्रदेश की धरती का भगवान बुद्ध से ऐतिहासिक संबंध रहा है। इसी आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने के लिए राज्य के दो महत्त्वपूर्ण जिलों का नाम भगवान बुद्ध के नामों पर रखा गया है, जिनमें से एक जिला यूपी के सबसे अमीर जिलों में शामिल है और यहां पर सबसे अधिक पढ़े-लिखे लोग रहते हैं। वहीं, दूसरा जिला भगवान बुद्ध से जुड़े अपने अनोखे संबंध के लिए जाना जाता है। इस लेख में हम इन दोनों जिलों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
किन दो जिलों का भगवान बुद्ध के ऊपर है नाम
पूरे उत्तर प्रदेश में दो जिले ऐसे हैं, जिनका नाम भगवान बुद्ध के ऊपर है। ये दो जिले गौतम बुद्ध नगर और सिद्धार्थनगर हैं।
गौतम बुद्ध नगर
इस जिले का नाम भगवान बुद्ध के संन्यासी और ज्ञान प्राप्ति के बाद के नाम 'गौतम बुद्ध' पर रखा गया है। जिले का गठन 6 सितंबर 1997 को गाजियाबाद और बुलंदशहर जिलों के कुछ हिस्सों को काटकर किया गया था। यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का एक बेहद महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।
जिले की है आधुनिक पहचान
आज यह जिला उत्तर प्रदेश का सबसे आधुनिक, हाई-टेक और औद्योगिक रूप से विकसित क्षेत्र है। विश्व प्रसिद्ध NOIDA और ग्रेटर नोएडा शहर इसी जिले में आते हैं।
जिला का आर्थिक महत्त्व
इसे उत्तर प्रदेश की 'आर्थिक राजधानी' भी कहा जाता है। भारत का सबसे बड़ा और निर्माणाधीन 'जेवर एयरपोर्ट' (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) भी इसी जिले का हिस्सा है। बुद्ध के नाम पर रखा गया यह जिला आज देश के आईटी हब कहलाता है और यह प्रदेश का सबसे अमीर जिला भी है।
सिद्धार्थनगर
इस जिले का नाम भगवान बुद्ध के बचपन के नाम 'राजकुमार सिद्धार्थ' पर रखा गया है, जो ज्ञान प्राप्ति से पहले उनका मूल नाम था। जिले का गठन 29 दिसंबर 1988 को बस्ती जिले के उत्तरी हिस्से को अलग करके किया गया था। यह उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में स्थित है और इसकी सीमा नेपाल देश से सटी हुई है।
बौद्ध धर्म से है ऐतिहासिक संबंध
इस जिले का ऐतिहासिक महत्त्व बहुत अधिक है। यहीं पर प्राचीन 'कपिलवस्तु' और वर्तमान में पिपरहवा स्थित है। यह वही जगह है, जहां राजकुमार सिद्धार्थ ने अपने जीवन के शुरुआती 29 साल बिताए थे। यहीं से उन्होंने राजपाट त्यागकर सत्य की खोज में 'महाभिनिष्क्रमण' (गृह त्याग) किया था। यहां खुदाई में मिले प्राचीन स्तूप और खंडहर इस गौरवशाली इतिहास की गवाही देते हैं।
जिले की है खास पहचान
यह जिला अपने खास 'काला नमक चावल' के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। इस सुगंधित चावल को 'बुद्ध का महाप्रसाद' भी कहा जाता है और इसे भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्राप्त है।
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