भारत के जंगलों को रॉयल बंगाल टाइगर का घर कहा जाता है। इस कड़ी में यहां कई ऐसे प्रसिद्ध टाइगर रहे हैं, जो विभिन्न नेशनल पार्कों की पहचान रहे हैं। हालांकि, भारत में एक टाइगर ऐसा भी रहा है, जिसका मुद्दा भारतीय संसद के निचले सदन यानि कि लोकसभा में उठाया गया था। यह वह टाइगर था, जो कि भारत के जंगलों से गायब हो गया था। क्या है इसकी पूरी कहानी, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
किस टाइगर का उठा था मुद्दा
भारत का प्रसिद्ध टाइगर ‘जय’ रहा है, जिसका गायब होने का मुद्दा लोकसभा में उठाया गया था। यह शेर महाराष्ट्र के जंगलों का सबसे लोकप्रिय शेर कहा जाता था, जिसे देखने के लिए लोग जंगल सफारी करते थे।
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किसने और कब उठाया था मुद्दा
भारत में नवंबर 2016 में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा की कार्यवाही में प्रश्नकाल के दौरान पूर्व सांसद रहे विनायक राउत और नाना पटोले ने सरकार से बाघ जय की मौजूदगी को लेकर सवाल पूछा था। सांसदों ने टाइगरजय के अवैध शिकार को लेकर आशंका जताई थी ।
इस पर तत्कालीन पर्यावरण और वन मंत्री अनिल माधव दवे ने लोकसभा में आधिकारिक जवाब देते हुए कहा था कि बाघ का दायरा काफी बड़ा होता है और मानसून के बाद उसकी तलाश जारी है, उसे अभी मृत नहीं माना गया है।
क्यों खास था बाघ जय
'जय' महाराष्ट्र के उमरेड-करहांडला वन्यजीव अभयारण्य का सबसे बड़ा और आकर्षक बाघ था, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते थे। अप्रैल 2016 में वह अचानक जंगलों से गायब हो गया था, जिसके बाद उसे ढूंढने के लिए सरकार ने कई टीमें भी बनाई और उस पर 50,000 रुपये का ईनाम भी घोषित किया था, लेकिन इसके बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला।
इतिहास में सबसे लंबी दूरी तय करने का रिकॉर्ड
आपको बता दें कि बाघ जय द्वारा साल 2013 में 3 साल की उम्र में अपनी जन्मस्थली नागझिरा वन्यजीव अभयारण्य को छोड़ दिया गया था और वह नई Territory की तलाश में निकल पड़ा था।
जय ने नेशनल हाईवे, रेलवे लाइनों, इंसानी बस्तियों और नदियों को पार करते हुए 150 किलोमीटर से भी अधिक की यात्रा पूर की थी और आखिर में उमरेड-करहांडला पहुंचा था। इतिहास में किसी बाघ द्वारा अपनी नई टेरिटरी के लिए तय की गई यह अब तक की सबसे लंबी दूरी में से एक मानी जाती है।
सेंचुरी को मिला था फायदा
उमरेड-करहांडला वन्यजीव अभयारण्य भारत में पहले उतना लोकप्रिय नहीं था। हालांकि, जब जय वहां पहुंचा, तो केवल उसे एक नजर देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक, रिसर्चर्स और फोटोग्राफर्स वहां पहुंचने लगे थे। इसके गाइड, ड्राइवर और होम-स्टे के रूप में लोगों को रोजगार मिला था, जिस वजह से जय को उस इलाके का ‘आर्थिक इंजन’ कहा गया था।
