आज कारगिल युद्ध को हुए 27 साल हो गए हैं। साल 1999 में यहां हुए भयानक युद्ध ने पूरा मंजर ही बदलकर रख दिया था। उस समय यहां तोप के धमाके और बारूद का धुआं हुआ करता था, हालांकि आज यह एरिया अदम्य देशभक्ति और पर्यटन के लिए जाना जाता है। बीते कई सालों में यह एरिया अब पूरी तरह बदल चुका है। आज यहां वार मेमोरियल से लेकर अन्य प्रमुख स्थान बने हुए हैं, जहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।
द्रास वार मेमोरियल
तोलोलिंग पहाड़ी के नीचे द्रास में एक बड़ा कारगिल वार मेमोरियल बनाया गया है। यहां लाल-गुलाबी बलुआ पत्थर की दीवार पर उन सभी 527 भारतीय शहीदों के नाम उकेरे गए हैं, जिन्होंने युद्ध में बलिदान दिया था।
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मेमोरियल से दिखता है टाइगर हिल
इस मेमोरियल के ठीक पीछे खड़े होकर आप देखेंगे, तो पाएंगे कि सामने ही टाइगर हिल, तोलोलिंग और प्वाइंट 4875 की चोटियां साफ दिखाई देती हैं।
सैनिक पर्यटन को मिला बढ़ावा
यह जगह श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-1D) पर स्थित है। ऐसे में लद्दाख जाने वाला लगभग हर पर्यटक यहां रुकता है। यहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक वीरगाथा सुनने के लिए पहुंचते हैं।
टाइगर हिल ट्रैक की शुरुआत
बीते कुछ समय पहले भारतीय सेना ने युवाओं को जोड़ने के लिए यहां टाइगर हिल ट्रैकिंग और मिलिट्री टूरिज्म को बढ़ावा दिया है। इससे स्थानीय युवाओं को गाइड के रूप में रोजगार मिल रहा है।
सैंडो टॉप से दिखती हैं चौकियां
यह कारगिल युद्ध क्षेत्र में ऐसी जगह है, जहां से युद्ध के ऐतिहासिक स्थानों को देखा जा सकता है। यहां गाइड पर्यटकों को अपने साथ लेकर पहुंचते हैं, जो कि फॉरवर्ड चौकियों के बारे में भी जानकारी देते हैं।
आज रहता है सख्त पहरा
युद्ध के समय यहां पाकिस्तानी सेना ने खाली पड़ी चोटियों को फायदा उठाकर कब्जा किया था, लेकिन अब यहां पहली वाली स्थिति नहीं है। भारतीय सेना की यहां हर चोटी पर पैनी नजर रहती है, जिससे कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता। यहां भारतीय सेना ऑल-वेदर निगरानी, राडार, ड्रोन्स और आधुनिक थर्मल कैमरों से 12 महीने और 24 घंटे बर्फीली चोटियों की कड़ी निगरानी करती है।
