भारत में सांसद बनने के लिए एक न्यूनतम आयु सीमा होती है, जो कि लोकसभा के लिए 25 वर्ष और राज्यसभा के लिए 30 वर्ष है। इस बात का जिक्र भारतीय संविधान में किया गया है। वहीं, सांसद के लिए अधिकतम उम्र सीमा का प्रावधान नहीं है। हालांकि, उम्र के साथ-साथ अन्य योग्यताएं भी हैं, जिन्हें एक संसद सदस्य को पूरा करना होता है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
संविधान में तय की गई है न्यूनतम उम्र
भारतीय संविधान में अनुच्छेद 84(बी) में दोनों सदनों के लिए अलग-अलग न्यूनतम उम्र सीमा तय की गई है। संसद में दो सदन लोकसभा और राज्यसभा होते हैं, ऐसे में दोनों की कार्यप्रणाली के हिसाब से उम्र सीमा तय की गई है, जो कि इस प्रकार हैः
लोकसभा के लिए आयु सीमा
लोकसभा को निचला सदन भी कहा जाता है, जहां सीधे जनता द्वारा चुनकर प्रतिनिधि को भेजा जाता है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष पूरी करनी होती है। इसका प्रमुख उद्देश्य सांसद का जमीनी स्तर से जुड़ा होना और संसद की समझ वाला व्यक्ति होना है।
राज्यसभा के लिए आयु सीमा
राज्यसभा को उच्च सदन भी कहा जाता है, जो कि कभी भंग नहीं किया जा सकता है। इसके सदस्यों का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं होता है, बल्कि विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा इसके सदस्य चुने जाते हैं। राज्यसभा को विशेषज्ञों का सदन कहा जाता है, क्योंकि यहां सामाजिक और प्रशासनिक अनुभव को भी प्राथमिकता दी जाती है। यह सदन लोकसभा द्वारा पेश किये गए विधेयकों की समीक्षा करता है।
सांसद बनने के लिए अन्य जरूरी योग्यताएं
सांसद बनने के लिए उम्र सीमा के साथ-साथ अन्य योग्यताएं भी पूरी करनी होती हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
-उम्मीदवार के पास अनिवार्य रूप से भारतीय नागरिकता होना जरूरी है।
-उम्मीदवार का नाम अनिवार्य रूप से किसी भी संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में होना चाहिए।
-उम्मीदवार के पास केंद्र या राज्य सरकार में किसी भी प्रकार का ‘लाभ के पद’ नहीं होने चाहिए।
-उम्मीदवार को न्यायालय द्वारा मानसिक रूप से अस्वस्थ या दीवालिया घोषित नहीं किया गया हो।
-जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1951 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को किसी अपराध में 2 साल या इससे अधिक की जेल की सजा हुई है, तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता है।
