भारत के अलग-अलग शहरों में आपको कई बड़ी और ऊंची-ऊंची मूर्तियां देखने को मिल जाएंगी। इस कड़ी में देश में कई ऊंची मूर्तियां हैं, जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। क्या आप भारत की ऐसी ही 5 मूर्तियों के बारे में जानते हैं, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी
यह न केवल भारत की, बल्कि दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है। भारत के पहले गृह मंत्री और 'लौह पुरुष' सरदार वल्लभभाई पटेल की यह मूर्ति 182 मीटर ऊंची है। आधार सहित इसकी कुल ऊंचाई 240 मीटर है, जो कि गुजरात के नर्मदा जिला में साधु बेट द्वीप पर है। इसे प्रसिद्ध भारतीय मूर्तिकार राम वी. सुतार ने डिजाइन किया था। यह मूर्ति इतनी बड़ी है कि इसे 7 किलोमीटर दूर से भी देखा जा सकता है। यह भारत की 562 रियासतों को एक करने में सरदार पटेल के योगदान का प्रतीक है।
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विश्वास स्वरूपम
यह भगवान शिव की दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है। यह मूर्ति भगवान शिव की ध्यान मुद्रा को दर्शाती है, जो कि 106.68 मीटर ऊंची है। आपको यह मूर्ति राजस्थान के राजसमंद जिले में देखने को मिल जाएगी। इस मूर्ति को इस तरह से बनाया गया है कि यह 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं और शक्तिशाली भूकंपों को भी सह सकती है। इसके अंदर पर्यटकों के लिए लिफ्ट और दर्शन गैलरी भी बनाई गई है।
स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी
यह 'बैठी हुई मुद्रा' में दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची मूर्ति है, जो कि 11वीं सदी के महान हिंदू संत और दार्शनिक रामानुजाचार्य की है। मूर्ति की ऊंचाई 65.8 मीटर है, जो कि तेलंगाना के हैदराबाद में है। इसका उद्घाटन 2022 में किया गया था। यह मूर्ति 'पंचलोहा' से बनी है। इसे सामाजिक समानता के उनके संदेश को समर्पित किया गया है।
स्टैच्यू ऑफ सोशल जस्टिस
यह डॉ. बी.आर. अंबेडकर की दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है, जिसकी कुल ऊंचाई 206 फीट है। यह मूर्ति आपको आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में देखने को मिलेगी। इसका उद्घाटन जनवरी 2024 में किया गया था। यह पूरी तरह से 'मेड इन इंडिया' प्रोजेक्ट है और इसे सामाजिक न्याय का प्रतीक माना गया है।
स्टैच्यू ऑफ प्रॉस्पेरिटी
यह मूर्ति बंगलुरु शहर के संस्थापक नादप्रभु केम्पेगौड़ा की है, जो कि 108 फीट ऊंची है। यह मूर्ति आपको कर्नाटक के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर देखने को मिलेगी। यह दुनिया में किसी भी शहर के संस्थापक की सबसे ऊंची कांस्य प्रतिमा है। इसे भी राम वी. सुतार ने ही डिजाइन किया है।
