केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ता (DA) सिर्फ सैलरी में मिलने वाली अतिरिक्त राशि नहीं है, बल्कि बढ़ती महंगाई के बीच खर्चों को लेकर यह अहम हो जाता है। यही कारण है कि इसे मूल वेतन यानी बेसिक पे में मर्ज करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। अब आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की सिफारिशों को लेकर चर्चा तेज होने के साथ यह मांग फिर सुर्खियों में है। ऐसे में सवाल है कि क्या इस बार कर्मचारियों को राहत मिल सकती है और पिछले वेतन आयोगों ने इस मुद्दे पर क्या फैसला लिया था?
5वें वेतन आयोग मे क्या हुआ था?
5वें वेतन आयोग ने महंगाई भत्ते को लेकर कई अहम सुझाव दिए थे। आयोग ने सभी स्तरों के कर्मचारियों के लिए DA के 100% न्यूट्रलाइजेशन की सिफारिश की थी। साथ ही, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में आधार स्तर के मुकाबले 50% की बढ़ोतरी होने पर DA को महंगाई वेतन (Dearness Pay) में बदलने का प्रस्ताव दिया था।
इस महंगाई वेतन को रिटायरमेंट लाभों समेत सभी संबंधित उद्देश्यों के लिए शामिल करने की बात कही गई थी। DA की गणना के लिए आयोग ने अलग-अलग कर्मचारी वर्गों के अलग सूचकांक बनाने के बजाय अखिल भारतीय औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीने के औसत का उपयोग करने का सुझाव दिया था।
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छठे और सातवें वेतन आयोग ने क्या कहा?
छठे वेतन आयोग ने 5वें आयोग की सिफारिशों का उल्लेख किया। वहीं, 7वें वेतन आयोग ने DA की गणना के मौजूदा तरीके में बदलाव की जरूरत नहीं समझी। उसका मानना था कि यह व्यवस्था वर्षों से काम कर रही है, इसलिए इसे जारी रखा जाना चाहिए।
8वें वेतन आयोग से क्या है उम्मीद?
फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों को मूल वेतन का 60% महंगाई भत्ता मिल रहा है। आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने की संभावना के बीच DA को बेसिक पे में मर्ज करने की मांग फिर जोर पकड़ रही है। हालांकि, DA मर्जर को लेकर अभी किसी अंतिम फैसले की पुष्टि नहीं हुई है।
कर्मचारी संगठनों ने रखीं अपनी मांगें
फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन (FNPO) ने मांग की है कि DA 25% से अधिक होने पर उसे मूल वेतन में मर्ज करने पर विचार किया जाए। भारत पेंशनर्स समाज ने भी महंगाई राहत (DR) में हर तीन महीने के औसत के आधार पर संशोधन और DR को मूल पेंशन में जोड़ने की संभावना पर विचार करने की मांग की है।
फॉर्मूले में बदलाव की मांग
कई कर्मचारी संगठनों ने AICPI-IW की गणना के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि महंगाई का आकलन करते समय तीन के बजाय 5 सदस्यों वाले परिवार को आधार बनाया जाए।
IRTSA का कहना है कि मौजूदा सूचकांक सरकारी कर्मचारियों के वास्तविक खर्च और खपत के पैटर्न को पूरी तरह नहीं दर्शाता। वहीं, अन्य कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठन मानते हैं कि DA और DR बढ़ती महंगाई के असर की पूरी भरपाई नहीं कर पाते।
अब 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर नजरें टिकी हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि आयोग DA मर्जर और उसकी गणना के फॉर्मूले पर ऐसा सुझाव देगा, जिससे उनकी वास्तविक आय और पेंशन को महंगाई से बेहतर सुरक्षा मिल सके।
