उत्तर प्रदेश की राजधानी की बात करें, तो यह लखनऊ है। हालांकि, इससे पहल भी राज्य की राजधानी रही है, जो कि समय-समय पर बदलती रही है। इस कड़ी में यूपी की सबसे पहली राजधानी भी रही है, जिसे राजधानी के तौर पर अंग्रेजों ने तय किया था। यह शहर कभी मुगलों का गढ़ रहा था। इस लेख में हम यूपी की समय-समय पर बदली गई राजधानियों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
उत्तर प्रदेश की सबसे पहली राजधानी
उत्तर प्रदेश की पहली राजधानी आगरा हुआ करती थी। उस समय इस प्रांत को उत्तर-पश्चिमी प्रांत के नाम से जाना जाता था। ऐसे में अंग्रेजों द्वारा 1836 में आगरा को इसकी राजधानी बनाया गया था, जो कि 22 सालों यानि कि 1858 तक रही थी।
1858 में प्रयागराज बना राजधानी
भारत में 1857 की क्रांति हुई, जिससे अंग्रेजों का प्रशासनिक ढांचा तक हिल गया था। ऐसे में क्रांति के बाद अंग्रेजों ने 1858 में आगरा से राजधानी को बदलकर प्रयागराज कर दिया। यह शहर पूरे 63 सालों तक यूपी की राजधानी रहा। आज भी प्रयागराज को पूरे उत्तर प्रदेश की न्यायिक राजधानी कहा जाता है। क्योंकि, यहां इलाहाबाद हाई कोर्ट मौजूद है।
1921 में लखनऊ बना राजधानी
समय के साथ-साथ लखनऊ शहर का विकास हुआ और यहां से रेल कनेक्टिविटी भी बढ़ी। वहीं, लखनऊ शहर प्रयागराज की तुलना में प्रांत के बीच में मौजूद था, जिससे पश्चिमी यूपी और पहाड़ी इलाकों से आने वाले लोगों को अधिक परेशानी नहीं होती थी। इन सभी कारणों की वजह से 1921 में लखनऊ को यूपी की राजधानी बनाया गया।
हालांकि, उस समय इसे आंशिक रूप से राजधानी बनाया गया था, लेकिन 1935 में लखनऊ को पूरी तरह से यूपी की राजधानी घोषित कर दिया गया। तब से अब तक लखनऊ ही यूपी की प्रशासनिक और विधायी राजधानी बन गया है। आज इसे 100 साल से भी अधिक हो गए हैं।
अंग्रेजों ने बनाए रखा संतुलन
अंग्रेजों ने बेशक राजधानी को लखनऊ शिफ्ट कर दिया था, लेकिन उन्होंने कोर्ट को नहीं हिलाया। आज भी यूपी की प्रिंसिपल बेंच इलाहाबाद हाई कोर्ट में ही बैठती है, जबकि इसकी एक छोटी ब्रांच लखनऊ में मौजूद है। अंग्रेजों द्वारा ऐसा संतुलन बनाए रखने के लिए किया गया था, जिससे यूपी के दोनों बड़े शहरों में मजबूत पकड़ बनी रहे।
