फतेहपुर सीकरी में दुनिया का सबसे बड़ा दरवाजा बुलंद दरवाजा बना हुआ है। इसका निर्माण मुगल सम्राट अकबर द्वारा करवाया गया था, जिसे लाल बलुआ पत्थरों को तराशकर बनाया गया था।
इस दरवाजे की भौगोलिक स्थिति की बात करें, तो यह फतेहपुर सीकरी की जामा मस्जिद के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर बना हुआ है, जिसके पीछे एक बड़ा आंगन बना हुआ है। इस दरवाजे का निर्माण अकबर द्वारा 1572-73 में गुजरात पर अपनी ऐतिहासिक जीत की खुशी में करवाया गया था।
गुजरात था राजस्व का बड़ा केंद्र
उस समय गुजरात व्यापार और राजस्व का बड़ा केंद्र हुआ करता था। ऐसे में गुजरात को जीतना एक बहुत बड़ी कामयाबी थी। अपनी इस शानदार जीत को यादगार बनाने के लिए अकबर ने इसे एक विजय स्तंभ के रूप में बनवाया था।
Related Stories
क्यों दिया था बुलंद दरवाजा नाम
बुलंद दरवाजे के अर्थ की बात करें, तो 'बुलंद' शब्द का अर्थ 'महान' या 'ऊंचा' होता है। ऐसे में अकबर इसके जरिए मुगलों की बढ़ती ताकत और वास्तुकला को दिखाना चाहता था। दरवाजे की ऊंचाई की बात करें, तो यह जमीन से ऊंचाई लगभग 54 मीटर (176 फीट) है।
दरवाजे का धार्मिक महत्त्व
बुलंद दरवाजे के धार्मिक महत्त्व की बात करें, तो यह सिर्फ स्मारक तक सीमित नहीं था, बल्कि यह जामा मस्जिद का मुख्य प्रवेश द्वार भी हुआ करता था। इस दरवाजे पर ईसा मसीह से जुड़ा एक मैसेज फारसी भाषा में लिखा गया है, जो अकबर की धार्मिक सुलाह-ए-कुल की नीति को दर्शाता है। इस दरवाजे पर कुरान की आयतें भी लिखी हुई हैं।
दरवाजे में लगी है डूबने वाली लकड़ी
इस दरवाजे में लगी लकड़ी को विशेष रूप से अफ्रीका से मंगवाया गया था। यह लकड़ी बहुत ही घनी होती है, जो कि पानी में भिगने से अधिक मजबूत होती है। इस दरवाजे पर बहुत सारी घोड़े की नाल देखने को मिलती है।
दरवाजे से जुड़ी है यह मान्यता
स्थानीय मान्यताओं में दरवाजे पर घोड़े की नाल लगाने का परंपरा है। इसके तहत यहां स्थानीय लोग मन्नत मांगने के साथ दरवाजे पर घोड़े की नाल लगाते हैं। आज भी बड़ी संख्या में पर्यटक इस दरवाजे को देखने के लिए पहुंचते हैं।
