Commonwealth Games: कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) भारत के लिए हमेशा से सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में से एक रहा है। हर संस्करण में भारतीय खिलाड़ियों ने नए रिकॉर्ड बनाए है। वहीं यदि भारत के सबसे सफल खेल की बात करें तो जवाब है शूटिंग। हाल के वर्षों में भले ही कुश्ती, बैडमिंटन और वेटलिफ्टिंग ने ज्यादा सुर्खियां बटोरी हों, लेकिन कुल पदकों के मामले में भारत के लिए शूटिंग आज भी सबसे आगे है।
अब तक भारतीय निशानेबाज कॉमनवेल्थ गेम्स में 135 मेडल जीत चुके हैं। हालांकि, लगातार दूसरी बार 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग को शामिल नहीं किया गया है।
आखिर 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग क्यों नहीं?
साल 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी पहले ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य के पास थी, लेकिन आर्थिक कारणों से उसने मेजबानी छोड़ दी। इसके बाद स्कॉटलैंड के ग्लासगो ने कम समय में आयोजन की जिम्मेदारी संभाली।
खर्च कम रखने के लिए आयोजकों ने इस बार खेल को छोटे स्तर पर आयोजित करने का फैसला लिया। इसी कारण से केवल 10 प्रमुख खेलों को कार्यक्रम में जगह मिली और शूटिंग, जो शुरुआती प्रस्तावित लिस्ट में थी, उसे फाइनल लिस्ट से बाहर कर दिया गया।
Related Stories
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का शूटिंग रिकॉर्ड
भारत ने पहली बार 1982 ब्रिस्बेन कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग में पदक जीता था। इसके बाद भारतीय निशानेबाजों ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया।
1982 ब्रिस्बेन: 1 कांस्य (कुल 1 मेडल)
1994 विक्टोरिया: 3 गोल्ड, 1 रजत (कुल 4 मेडल)
1998 कुआलालंपुर: 2 स्वर्ण, 3 रजत, 2 कांस्य (कुल 7 मेडल)
2002 मैनचेस्टर: 14 गोल्ड, 7 रजत, 3 कांस्य (कुल 24 मेडल)
2006 मेलबर्न: 16 स्वर्ण, 7 रजत, 4 कांस्य (कुल 27 मेडल)
2010 नई दिल्ली: 14 स्वर्ण, 11 रजत, 5 कांस्य (कुल 30 मेडल- भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन)
2014 ग्लासगो: 4 स्वर्ण, 9 रजत, 4 कांस्य (कुल 17 मेडल)
2018 गोल्ड कोस्ट: 7 गोल्ड, 4 रजत, 5 कांस्य (कुल 16 मेडल)
2022 बर्मिंघम: शूटिंग खेल ही शामिल नहीं था
2026 ग्लासगो: इस बार भी शूटिंग शामिल नहीं
भारत का सबसे सफल कॉमनवेल्थ खिलाड़ी कौन?
यदि कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सबसे सफल खिलाड़ी की बात करें तो यह रिकॉर्ड जसपाल राणा (Jaspal Rana) के नाम है। उन्होंने 1994 से 2006 के बीच चार कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया और 15 पदक जीते, जिनमें 9 गोल्ड मेडल शामिल हैं। जिनका हाल ही में निधन हो गया था।
उनके बाद दूसरे स्थान पर निशानेबाज समरेश जंग हैं। उन्होंने 2002, 2006 और 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 14 मेडल अपने नाम किए और कई मुकाबलों में जसपाल राणा के साथ मिलकर भारत को स्वर्ण दिलाया।
भारत के लिए क्यों खास रही शूटिंग?
शूटिंग सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की सबसे बड़ी ताकत रही है। 2002 से 2018 तक लगभग हर संस्करण में भारतीय निशानेबाजों ने पदकों की झड़ी लगाई और मेडल टैली में सम्मानजनक स्थिति हासिल की। यही वजह है कि 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स से शूटिंग का बाहर होना भारतीय खेल प्रेमियों के लिए बड़ी निराशा माना जा रहा है।
