भारत को 15 अगस्त, 1947 को आजादी मिली थी। हालांकि, इससे पहले कई शहर ऐसे थे, जो कि क्रांति, जन-आंदोलनों और स्थानीय सरकार के बनने की वजह से 15 अगस्त से पहले ही आजाद हो गए थे। इनमें बलिया, सतारा और तमलुक का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
बलिया, उत्तर प्रदेश
यूपी का बलिया जिला भारत का पहला शहर है, जिसे 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान आजादी मिल गई थी। यहां के लोगों ने खुद को अंग्रेजों की गुलामी से खुद को मुक्त घोषित कर दिया था। बलिया के नायक चित्तू पांडे हैं, जिन्हें 'शेर-ए-बलिया' कहा जाता है। यहां 19 अगस्त 1942 को जनसैलाब ने थाने, जेल और कलेक्टर कार्यालय पर कब्जा कर अंग्रेजी प्रशासन को खदेड़ दिया था। वहीं, चित्तू पांडे के नेतृत्व में यहां अपनी आजाद सरकार बनाई गई थी, जो कि कुछ दिनों तक चली थी। यही वजह है कि चित्तू पांडे को बागी बलिया भी कहा जाता है।
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सातारा, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र का सतारा व इसके आस-पास का इलाका 1943 में ही अंग्रेजों से आजाद हो गया था। यहां क्रांति के नायक नाना पाटिल थे, जिन्होंने अपनी खुद की सरकार चलाई थी, जिसे 'प्रति सरकार' कहा जाता था। उन्होंने अपने समय में कोर्ट, पुलिस व्यवस्था और टैक्स कलेक्शन सिस्टम तक शुरू कर दिया था। यह सरकार अगले 3 सालों तक चलती रही थी।
तमलुक, पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले के तमलुक शहर ने 1942 में ही खुद को अंग्रेजों को मुक्त कर लिया था। यहां स्थानीय लोगों ने 'ताम्रलिप्त जातीय सरकार' का गठन किया था। वहीं, 73 वर्षीय वृद्धा मातंगिनी हाजरा ने हाथ में तिरंगा लेकर पुलिस स्टेशन पर कब्जा करने का नेतृत्व किया था, जहां वह गोलियां लगने के बाद भी 'वंदे मातरम' बोलते हुए शहीद हो गईं थीं। यह सरकार सितंबर 1944 तक चली थी।
मोइरांग, मणिपुर
आपको बात दें कि पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर राज्य के मोइरांग शहर आजाद हिंद फौज का एक बड़ा केंद्र था। यहां 1944 को कर्नल शौकत मलिक के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज ने ब्रिटिश सेना को हराकर मोइरांग में तिरंगा फहराकर इसे आजाद घोषित किया था।
