भारत के उत्तर में जब भी प्रमुख राज्यों की बात होती है, तो इसमें उत्तर प्रदेश का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। राज्य अपनी सांस्कृतिक विरासत और समृद्ध इतिहास के लिए जाना जाता है, जिसकी झलक हमें यहां बने संग्रहालयों में देखने को मिलती है।
हालांकि, राज्य में एक ऐसा संग्रहालय भी मौजूद है, जिसे यूपी का सबसे पुराना संग्रहालय कहा जाता है। यहां आज भी 3000 साल पुरानी मिस्र की ममी मौजूद है, जो कि संग्रहालय में आकर्षण क केंद्र रहती है। इसे मिलाकर म्यूजियम में 1 लाख से अधिक पुरानी चीजें मौजूद हैं। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
यूपी का सबसे पुराना म्यूजियम
उत्तर प्रदेश का सबसे पुराना म्यूजियम राज्य संग्रहालय है, जो कि राज्य की राजधानी लखनऊ में स्थित है। यह देश के सबसे समृद्ध बहुउद्देशीय संग्रहालयों में गिना जाना जाता है, जिसकी स्थापना ब्रिटिश काल में 1863 में कर्नल सान्डर्स एलेक्सियस एबॉट के निजी संग्रह के साथ हुई थी।
पहले इस नाम से जाना जाता था म्यूजियम
उत्तर प्रदेश राज्य म्यूजियम को पहले प्रांतीय म्यूजियम के नाम से जाना जाता था। क्योंकि, उस समय यह ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण में हुआ था। देश के आजाद के होने के बाद 1950 में इसका नाम बदलकर राज्य संग्रहालय कर दिया गया। पहले यह छत्तर मंजिल और लाल बारादरी में हुआ करता था, हालांकि अब इसका स्थान वाजीद अली शाह राष्ट्रीय पार्क में कर दिया गया है।
संग्रहालय में 3000 साल पुरानी मिस्र की ममी
इस संग्रहालय में एक मिस्र गैलरी बनी हुई है, जिसमें 1000 ईसा पूर्व की मिस्र की ममी और इसका ताबूत रखा हुआ है। यहां पहुंचने वाले पर्यटक इस गैलरी को जरूर देखते हैं।
अवध गैलरी भी है आकर्षण का केंद्र
लखनऊ के राज्य म्यूजियम में अवध गैलरी भी आकर्षण का मुख्य केंद्र मानी जाती है। इस जगह पर अवध के नवाबों के शाही कपड़े, बर्तन, साज-सज्जा के सामान और शाही चीजें रखी गई हैं। यहां रखी चीजें अवध के शाही नवाबों के जीवन से रूबरू करवाती हैं।
448 ईस्वी की मनकुवार बुद्ध प्रतिमा
इस म्यूजियम में जैन और बौद्ध काल के कई प्राचीन मूर्तियां और अवशेष भी रखे गए हैं। इनमें से एक 448 ईस्वी का प्रसिद्ध मनकुवार बुद्ध प्रतिमा है। इसके अलावा है मथुरा से प्राप्त हुए कुषाण काल के अवशेषों को भी यहां रखा गया है।
