भारत के सर्वेश कुमार ने ग्लासगो में हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में देश को ऐतिहासिक मेडल दिलाया है। उन्होंने पुरुषों की हाई जम्प स्पर्धा में देश के नाम सिल्वर मेडल किया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। वहीं, दूसरी तरफ वालुरी अजाया बाबू ने 79 वर्ग किलोग्राम में सिल्वर मेडल जीता है। इससे पहले उनके पिता ने 2010 में कांस्य पदक जीता था।
2.25 मीटर की जम्प लगाकर जीता मेडल
सर्वेश कुमार कुशारे ने 2.25 मीटर की जम्प लगाकर दूसरा स्थान हासिल किया है। जमैका के रोमेन बेकफोर्ड ने पहले स्थान पर आने के बाद गोल्ड जीता है। वहीं, इंग्लैंड की जैक किमानी ने 2.20 मीटर की जम्प में तीसरे पायदान पर रहते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया है। भारत की तरफ से आदर्श राम ने 2.15 मीटर की जम्प के साथ पांचवां स्थान हासिल किया है।
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कुशारे से पहले तेजस्वनी ने रचा था इतिहास
आपको बता दें कि हाई जम्प में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय तेजस्वनी शंकर थे। उन्होंने 2022 में बर्मिंघम हुए राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीता था। हालांकि, इस बार के राष्ट्रमंडल खेलों में कुशारे ने मेडल का रंग बदल दिया है। इस बार भी तेजस्वनी काम्पीटिशन में थे, लेकिन वह अपने पहले प्रयास में 2.05 मीटर का मार्क क्रॉस नहीं कर सके।
अजाया बाबू ने रचा इतिहास
सिर्फ 21 साल के अजाया बाबू ने कुल 330 किलोग्राम वजन उठाते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया है। बाबू ने स्नैच में 140 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 181 किलोग्राम उठाते हुए भारत की झोली में रजत पदक डाला है। ध्यान देने वाली बात यह है कि बाबू मलेशिया की एली से सिर्फ 1 किलोग्राम से गोल्ड मेडल जीतने से रह गए हैं। वहीं, इंग्लैंड की ओर से शामिल खिलाड़ी क्रिस मरे ने कुल 325 किलोग्राम के साथ ब्रांज मेडल जीता है।
अजाया के पिता ने रचा था इतिहास
अजाया के पिता श्रीनिवासा ने 2010 में भारत में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में इतिहास रचा था। उन्होंने 56 किलोग्राम वर्ग में ब्रांज मेडल भारत के नाम किया था। अब 16 साल बाद उनके बेटे ने इतिहास रचते हुए मेडल का रंग बदल दिया है और भारत की झोली में सिल्वर मेडल डाला है।
