भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें यहां कई ऐसे शहर मिलेंगे, जिनका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों के साथ दर्ज है। इस कड़ी में यहां एक ऐसा शहर भी है, जिसका नाम सबसे अधिक दरवाजों के लिए लिया जाता है। यहां कभी 52 दरवाजों से प्रवेश होता था। यही वजह है कि इस शहर को कभी ‘दरवाजों का शहर’ भी कहा जाता था। कौन-सा है यह शहर, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
भारत में सबसे अधिक दरवाजों वाला शहर
भारत में सबसे अधिक दरवाजों वाले शहर की बात करें, तो यह छत्रपति संभाजीनगर है। इसे पहले औरंगाबाद नाम से जाना जाता था। महाराष्ट्र में स्थित इस ऐतिहासिक शहर को आधिकारिक तौर पर ‘गेटवे ऑफ द डेक्कन’ और ‘सिटी ऑफ गेट्स’ के नाम से जाना जाता है।
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क्यों बनाए गए थे दरवाजें
मध्यकालीन इतिहास में इस शहर में सुरक्षा के लिए कुल 52 प्रवेश द्वारों को बनाया गया था। इन दरवाजों का निर्माण अहमदनगर के वजीर रहे मलिक अंबर और बाद में मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा शहर को सुरक्षित करने के लिए करवाया गया था।
आज कितने हैं दरवाजे
समय के साथ ये दरवाजे अब खत्म हो गए हैं। हालांकि, आज भी यहां 13 मुख्य ऐतिहासिक दरवाजे पूरी तरह सुरक्षित हैं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं।
ये हैं शहर के प्रमुख दरवाजें
शहर के कुछ प्रमुख दरवाजों की बात करें, तो इनमें भदकल दरवाजा, दिल्ली दरवाजा और पैठन दरवाजा शामिल हैः
भदकल दरवाजा: यह दरवाजा शहर का सबसे बड़ा और पहला स्तंभ-आधारित ऐतिहासिक दरवाजा है। इसे मलिक अंबर ने 1612 में मुगलों पर जीत की याद में बनवाया था।
दिल्ली दरवाजा: यह दरवाजा उत्तर दिशा में है और सबसे भव्य दरवाजा माना जाता है, जिसका मुंह दिल्ली की ओर है। इस दरवाजे का निर्माण औरंगजेब ने करवाया था।
मक्का दरवाजा: यह दरवाजा पश्चिम दिशा में बना हुआ है, जिसका रुख पवित्र शहर मक्का की तरफ है।
पैठन दरवाजा: यह दरवाजा दक्षिण दिशा में बना हुआ है, जो कि ऐतिहासिक पैठन शहर की ओर जाने वाले रास्ते पर है।
रोशन दरवाजा: औरंगजेब ने इस दरवाजे का नाम अपनी पसंदीदा बहन रोशनआरा के नाम पर रखा था।
