बिहार के बारे में आपने पढ़ा और सुना ही होगा। यह भारत का वह राज्य है, जिसे बुद्ध की धरती कहा जाता है। बिहार सिर्फ एक राज्य के नाम तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका संबंध ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा हुआ है। इस शब्द के अर्थ में गहराई है, जो कि वर्षों से इसके साथ है। इस लेख में हम बिहार के शाब्दिक अर्थ के बारे में विस्तार से जानेंगे।
बिहार को कहा जाता है ‘बौद्ध मठों की भूमि’
बिहार शब्द की उत्पत्ति मूल रूप से संस्कृत और पाली भाषा के शब्द ‘विहार’ से हुई है। प्राचीन भारत में बौद्ध भिक्षुओं के रहने और आश्रम को ‘विहार’ कहा जाता था। इन जगहों पर बौद्ध भिक्षु धर्म की शिक्षाओं पर चर्चा करते थे और और ज्ञान देते थे। ऐसे में इस जगह को ‘बौद्ध विहार’ कहा जाता था।
कैसे हुआ 'विहार' से 'बिहार'
भारत में मध्यकाल के समय तुर्क और अफगानों का आगमन हुआ। ऐसे में बोलचाल में प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं की वजह से ‘व’ की ध्वनि धीरे-धीरे ‘ब’ में बदल गई और यह ‘विहार’ से ‘बिहार’ हो गया।
ऐसे पड़ा 'बिहार' नाम
प्राचीन भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार रहे मिनहाज-उस-सिराज ने अपनी पुस्तक 'तबकात-ए-नासिरी' में बिहार का उल्लेख किया था। जब तुर्कों ने मगध क्षेत्र यानि कि आज के आधुनिक बिहार पर हमला किया था, तब वे यहां बने अनगिनत भव्य बौद्ध मठों यानि कि विहारों को देखकर हैरान रह गए थे।
यहां बौद्ध भिक्षुओं और उनके विहारों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि उन्होंने इस पूरे क्षेत्र को 'अर्ज-ए-बिहार' नाम दिया। वहीं, जब मुगल काल आया, तो सम्राट अकबर ने इसे अलग से प्रांत बनाया, जिसे बिहार नाम दिया गया।
क्या होता है बिहार का दार्शनिक अर्थ ?
अब हम बिहार के दार्शनिक अर्थ को समझ लेते हैं। विहार शब्द का एक अर्थ घूमना या फिर मजे से रहना भी होता है। ऐसे में यह ज्ञान का विहार हुआ, जहां भगवान बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया और दुनिया को अहिंसा का रास्ता दिखाया।
-जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म और निर्वाण इसी भूमि पर हुआ है।
-सिखों के 10वें गुरु रहे गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म भी इस भूमि पर पटना साहिब में हुआ।
वैचारिक रूप से बिहार का अर्थ
यदि वैचारिक रूप से बिहार के अर्थ की बात करें, तो इसका अर्थ एक ऐसे स्थान से है, जहां सच, ज्ञान और अध्यात्म की खोज में पूरी दुनिया से विचारक आए और यहां निवास किया।
