भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें इतिहास कई रोचक कहानियों से भरा हुआ मिलता है। इस कड़ी में भारत में कभी ऐसे मुगल सम्राट भी रहे हैं, जिन्होंने अपने शासनकाल में ‘राम-सिया’ के सोने-चांदी के सिक्के जारी किये थे। यह उस दौर में जारी हुए पहले और आखिरी सिक्के थे, जिन पर किसी चित्र को उकेरा गया था। आज भी इन सिक्कों को भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय और वाराणसी के बीएचयू स्थित कला भवन में देखा जा सकता है।
किसने जारी किये थे ‘राम-सिया’ के सिक्के
भारत के इतिहास में मुगल सम्राट अकबर ने अपने शासनकाल में 1604-1605 के बीच सोने-चांदी के ‘राम-सिया’ सिक्के जारी किये थे। इन सिक्कों को राम टका भी कहा जाता था। सिक्के के एक तरफ धनुष-बाण लिए भगवान राम और माता सीता की आकृति को उकेरा गया था। वहीं, दूसरी तरफ फारसी में ‘राम-सिया’ लिखा गया था। अकबर द्वारा यह कदम अपनी धार्मिक सहिष्णुता दिखाने और दरबारी राजा टोडरमल की सलाह पर उठाया गया था।
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इन नामों से जाने जाते थे सिक्के
अकबर द्वारा जारी ‘राम-सिया’ के सिक्कों में सोने के सिक्कों को 'आधा मोहर' और चांदी के सिक्कों को 'रुपया' या 'टका' नाम से जाना जाता था। सोने के सिक्के का वजन 6.2 ग्राम, जबकि डायमीटर 2 सेंटीमीटर रखा गया था। आपको बता दें कि ये अकबर के शासनकाल में ये इकलौते ऐसे सिक्के थे, जिन पर मानव आकृतियों को बनाया गया था, क्योंकि इस्लाम में मूर्ती या मानव चित्र बनाना वर्जित है।
सिक्के पर लिखा है अममदाद इलाही 50
‘राम-सिया’ के सिक्कों पर पीछे की तरफ फारसी में अममदाद इलाही 50 लिखा हुआ है। इसका मतलब है कि सिक्का अकबर के शासनकाल के 50वें वर्ष के अमरदाद(फारसी) महीने में ढाला गया है।
पूरी दुनिया में सिर्फ 3 सिक्के ही मौजूद
आज ‘राम-सिया’ वाले सिक्के पूरी दुनिया में तीन ही हैं। इनमें एक सोने का और दो चांदी के सिक्के हैं। सोने का सिक्का नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा गया है। वहीं, चांदी का सिक्का वाराणसी स्थित बीएचयू के भारत कला भवन में सुरक्षित है। आपको बता दें कि इन सिक्कों को पहले विदेशों में महंगी बोली में खरीदा गया था, जिसमें 2010 में चांदी का एक सिक्क 1,40,000 डॉलर में बिका था।
