दुनिया में कुल 195 देश हैं, जो कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य हैं। इस कड़ी में हर देश के पास अपना लिखित संविधान है, जिसके माध्यम से देश में प्रशासनिक और राजनीतिक कामकाज संभाले जाते हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि एशिया का सबसे पहला लिखित संविधान किस देश के पास है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे। आपको हिंट के तौर पर बता दें कि इस देश को भारत का पुराना दोस्ता कहा जाता है।
एशिया का सबसे पहला लिखित संविधान
एशिया का सबसे पहला लिखित संविधान ‘मीजी संविधान’ है, जो कि आधिकारिक तौर पर जापान का संविधान है। एशिया का इतिहास उठाकर देखें, तो यह अपने आप में एक बड़ा कदम था, क्योंकि खुद के संविधान की मदद से जापान वैश्विक स्तर पर एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरा था।
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कब लागू हुआ था संविधान
जापान का पहला लिखित संविधान 11 फरवरी, 1889 को घोषित हुआ और 29 नवंबर, 1890 को प्रभावी हुआ था। इस संविधान में जापान के राजा को सबसे ऊपर माना गया, जिसमें नागरिकों को भाषण, धर्म और सभा करने की आजादी तो दी गई, लेकिन ये सभी अधिकार सरकार की सीमाओं में थे।
एशिया की पहली संसद
जापान का लिखित संविधान बनने के बाद एशिया की पहली संसद बनी, जिसे ‘डाइट’ कहा गया। इसमें दो सदन होते थे, जिसमें एक ‘हाउस ऑफ पीयर्स’ और दूसरी ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ थे।
लोकतांत्रिक क्यों नहीं था संविधान
एशिया का पहला लिखित संविधान लोकतांत्रिक नहीं था, क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री और कैबिनेट मंत्री संसद के प्रति नहीं, बल्कि राजा के प्रति जवाबदेही होते थे। संविधान के तहत शुरुआत में सिर्फ संपत्ति रखने वाले 5 फीसदी पुरुषों को ही वोट देने का अधिकार था। वहीं, सेना भी राजा के प्रति उत्तरदायी होती थी।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद बदल गया संविधान
दूसरे विश्व युद्ध में जापान की हार हुई, जिसके बाद इस देश का संविधान 3 मई, 1947 को ‘शोवा संविधान’ लागू हुआ। इसमें राजा की शक्तियों को खत्म कर आम जनता के हाथ में शक्तियां दी गईं। ऐसे में जापान में राजा का राज पूरी तरह समाप्त हो गया और सेना भी राजा के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो गई थी। इस प्रकार एशिया का पहला लिखित संविधान लोकतांत्रिक संविधान भी बन गया।
