ब्रिटिश भारत में ‘विपक्ष के नेता’ कौन थे, जिन्हें कहा जाता है गांधी जी का गुरु

वर्तमान में यदि आप सभी से विपक्ष का नेता पूछा जाए, तो आप बता देंगे। हालांकि, यदि ब्रिटिश भारत में ‘विपक्ष के नेता’ के बारे में पूछा जाए, तो शायद ही आप जवाब दे सके। यदि आप इसका उत्तर नहीं जानते हैं, तो इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।

Jun 30, 2026, 16:30 IST
गांधी के राजनीतिक गुरु
गांधी के राजनीतिक गुरु

भारत में अंग्रेजों ने करीब 200 सालों तक राज किया। इस दौरान भारतीयों ने अपनी कौशल और बुद्धि के आधार पर खुद को अंग्रेजों के सामने खड़ा किया और देश की आजादी में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस कड़ी में यदि आपसे वर्तमान में विपक्ष के नेता के बारे में पूछा जाए, तो आप जवाब दे देंगे।

हालांकि, यदि आप से ब्रिटिश भारत में ‘विपक्ष के नेता’ के बारे में पूछा जाए, तो शायद आप इसका जवाब दे पाएंगे। यह वही व्यक्ति हैं, जिन्हें महात्मा गांधी का गुरु कहा जाता था। इस लेख में हम उनके बारे में विस्तार से जानेंगे।

किसे कहा जाता है ब्रिटिश भारत में ‘विपक्ष के नेता’

आपको बता दें कि ब्रिटिश भारत में विपक्ष का नेता गोपाल कृष्ण गोखले को कहा जाता था। वह अपने तार्किक विचारों और तेज बुद्धि के लिए जाने जाते थे, जो कि अपने सवालों से अंग्रेजों को भी चुप करवा देते थे। यही वजह थी कि उन्हें अंग्रेज ‘विपक्ष के नेता’ के तौर पर बुलाते थे।  

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इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल में भूमिका

साल 1902 में जी.के. गोखले को 'इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल' (केंद्रीय विधान परिषद) के सदस्य के तौर पर चुना गया था। उस समय भारत में ब्रिटिश वायसराय और उनकी काउंसिल ही सरकार हुआ करती थी। ऐसे में काउंसिल में भारतीय सदस्यों का काम एक 'विपक्ष' की तरह सरकार की नीतियों की आलोचना करने के साथ जनता की आवाज उठाना होता था। गोखले इस गुट के नेता थे।

बजट पर गोखले का ऐतिहासिक भाषण

गोखले को उनकी तथ्यों और आंकड़ों के साथ बोलने वाली कला के लिए जाना जाता था। वह ब्रिटिश काउंसिल में सरकार को तथ्यों के आधार पर घेर लेते थे, जिससे ब्रिटिश अधिकारी भी हैरान हो जाते थे। उन्होंने ब्रिटिश सरकार को बजट पर घेर लिया था, जिसमें उन्होंने सैन्य खर्चों में बढ़ोतरी के साथ भारी टैक्स का विरोध किया था।

उनकी मांग थी कि भारतीयों के टैक्स का पैसा सेना पर खर्च करने के बजाय शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च होना चाहिए। यही कारण था कि उन्हें उनके बजटीय भाषण के कारण ही उन्हें 'भारत का ग्लैडस्टोन' (ब्रिटेन के महान अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री के नाम पर) कहा गया था।

गोखले द्वारा किए गए प्रमुख कार्य

गोखले ने काउंसिल में भारत के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा बिल(1911) पेश किया था, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने इस बिल को पास होने नहीं दिया। वहीं, उन्होंने गांधी की दांडी यात्रा से पहले नमक कर हटाने के लिए काउंसिल में मांग की थी। यही वजह थी कि लॉर्ड कर्जन जैसे अड़ियल वायसराय ने भी यह माना था कि काउंसिल में गोखले जैसे विद्वान कोई दूसरा नहीं है। 

महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु

गोखले के तार्किक विचारों और उनकी विपक्षी राजनीतिक से प्रभावित होकर गांधी जी ने उन्हें अपना राजनीतिक गुरु माना था। इस बात का जिक्र गांधी ने अपनी पुस्तक 'धर्मात्मा गोखले' में किया है। उन्होंने लिखा है कि गोखले के पास पहुंचने पर उन्हें एक सच्चे मार्गदर्शक और पिता जैसा अहसास होता था।

Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

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