भारत के इतिहास में आपने अलग-अलग युद्धों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। कुछ युद्ध ऐसे हुए, जो हमेशा के लिए अतीत के पन्नों में रह गए। इनमें कुछ युद्ध ऐसे भी हैं, जिन्हें आज भी कई मिलिट्री अकादमियों में पढ़ाया जाता है। इस लेख में हम इतिहास के कुछ ऐसे ही युद्ध के बारे में जानेंगे, जो अपनी सैन्य रणनीतियों के लिए जाने जाते हैं।
किन दो युद्धों के बारे में पढ़ाया जाता है
इतिहास में कई ऐसे युद्ध हुए हैं, जिनके बारे में सैन्य रणनीतियों को लेकर आज भी मिलिट्री अकादमियों में पढ़ाया जाता है। इनमें इतिहास का पालखेड़ का युद्ध (1728) और सारागढ़ी का युद्ध (1897) प्रमुख रूप से शामिल हैं।
क्या था पालखेड़ का युद्ध
पालखेड़ का युद्ध 28 फरवरी, 1728 को हुआ था। यह युद्ध पेशवा बाजीराव प्रथम और हैदराबाद के निजाम आसिफ जाह के बीच लड़ा गया था। बाजीराव प्रथम ने इस युद्ध में अपनी कुशल रणनीति का परिचय देते हुए बिना किसी खून-खराबे के घुड़सवार सेना की चाल और रसद की आपूर्ति काटने की रणनीति से निजाम को पस्त कर दिया था। बाजीराव प्रथम की इस सैन्य रणनीति को आज भी भारत की कई प्रमुख मिलिट्री अकादमियों में पढ़ाया जाता है।
क्या था सारागढ़ी का युद्ध
आपने सारागढ़ी के युद्ध के बारे में सुना ही होगा। इसके ऊपर बॉलीवुड में एक फिल्म केसरी भी बनी है। यह युद्ध 12 सितंबर, 1897 को ब्रिटिश भारतीय सेना के 21 सिख जवानों और करीब 10,000 अफगान पठानों के बीच हुआ था। इस युद्ध में सिख सैनिकों के पास सीमित संसाधन थे। ऐसे में सीमित संसाधनों और भारी संख्याबल में मौजूद अफगानों के सामने साहस, गोलीबारी का सही उपयोग और अंतिम दम तक मोर्चे पर डटे रहने के कारण इसे दुनिया के सबसे महान सैन्य संघर्षों में गिना जाता है। यही वजह है कि इस युद्ध को लेकर आज भी मिलिट्री अकादमियों में कक्षाएं दी जाती हैं।
ब्रिटेन की अकादमी में पढ़ाया जाता है युद्ध
आपको बता दें कि सारागाढ़ी को लास्ट स्टैंड युद्ध भी कहा जाता है और इसे आज भी ब्रिटेन की रॉयल मिलिट्री अकादमी सैंडहर्स्ट में पढ़ाया जाता है। इस युद्ध को यहां के प्रमुख पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।
