राजस्थान का भानगढ़ किला क्यों हुआ था वीरान, 1783 में घटी थी यह घटना, पढ़ें असली वजह

आपने राजस्थान के भानगढ़ किले के बारे में सुना या पढ़ा ही होगा। क्योंकि, यह भारत का वह किला है, जिसके बारे में सोशल मीडिया पर हांटेड होने का दावा किया जाता है। हालांकि, सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। इस लेख में हम इसकी असली कहानी के बारे में जानेंगे।  

Jul 1, 2026, 17:17 IST
भानगढ़ किला
भानगढ़ किला

राजस्थान का भानगढ़ किला, भारत का वह किला है, जिसे हांटेड होने का दावा किया जाता है। इस किले को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की वीडियों और तथ्य उपलब्ध हैं, जिनमें किले का हांटेड होने का दावा किया है। हालांकि, अभी तक कोई इसे प्रमाणित नहीं कर सका है। भानगढ़ का किला अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर ASI ने शाम ढलने के बाद क्यों लगाया है किले में प्रवेश पर प्रतिबंध और क्या है किले के वीरान होने की असली कहानी। 

क्या है भानगढ़ किले का इतिहास 

भानगढ़ किले का निर्माण 1583 में आमेर का राजा भगवंत दास ने अपने छोटे बेटे माधव सिंह के लिए करवाया था। माधव सिंह मुगल सम्राट अकबर का सिपहसालार था और राजा मानसिंह का भाई था।

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किले में रहा करते थे करीब 10,000 लोग

यह किला कभी अपनी समृद्धि के लिए विश्व विख्यात था। यहां एक समय बड़े स्तर पर व्यापार हुआ करता था और यहां करीब 10,000 लोग रहा करते थे। यह किला सुरक्षा के लिहाज से भी बहुत महत्त्वपूर्ण था।

किले की वास्तुकला पर एक नजर 

यह किला कभी अपनी वास्तुकला के लिए भी जाना जाता था। किले का निर्माण अरावली की पहाड़ियों की ढलान पर किया गया है, जिसके चारों ओर तीन मजबूत दीवारें बनाई गई थीं। इसके मुख्य दरवाजों में दिल्ली गेट, लाहौरी गेट, अजमेरी गेट, फुलबारी गेट और हनुमान दरवाजा शामिल है। वहीं, किले में एक ऊंची चोटी पर राजा का सात मंजिला महल हुआ करता था, जो कि अब चार मंजिला रह गया है। इसके प्रवेश द्वार के बाद जौहरी बाजार शुरू हो जाता था, जहां लोग खरीददारी के लिए पहुंचते थे। 

कैसे वीरान हुआ था किला 

17वीं सदी आते-आते माधव सिंह के बेटों के बीच सत्ता को लेकर संघर्ष शुरू हो गया था। ऐसे में 1720 में जयपुर के राजा रहे जयसिंह द्वितीय ने भानगढ़ को अपनी रियासत में मिला दिया था। बाद में इसकी आबादी कम होने लगी थी और 1783 में भीषण आकाल की वजह से यहां पूरी तरह उजड़ गया, जिसके बाद लोग इस जगह को छोड़कर चले गए।

ASI ने क्यों लगाया है चेतावनी बोर्ड

इस किल के बाहर भारतीय पुरातत्व विभाग ने चेतावनी बोर्ड लगा रखा है, जिसमें लिखा है कि सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय के पहले किले में प्रवेश करना मना है। इसे लोग भूतिया कहानियों से जोड़ लेते हैं, जबकि वास्तव में यह जंगली जानवरों से बचाव के लिए लगाया गया है।

क्योंकि, इस किले के पास सरिस्का टाइगर रिजर्व है। ऐसे में यहां अंधेरे में जंगली जानवरों के आने का खतरा रहता है। किसी भी प्रकार की घटना से बचने के लिए विभाग ने यह चेतावनी बोर्ड लगाया है, जिसे लेकर गलत तरीके से भूतों से जोड़ लेते हैं।

Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

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