देशभर में 26 जुलाई का दिन कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भारतीय सेना ने अपने शौर्य और वीरता के दम पर भारत की दुर्गम पहाड़ियों से पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़कर जीत हासिल की थी।
इस युद्ध को कारगिल विजय दिवस के रूप में जाना जाता है। इस युद्ध में टाइगर हिल सबसे प्रमुख चोटियों में शामिल रही है, जो कि युद्ध का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुई थी। इस लेख में हम आपको कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जानकारी देंगे।
NH-1D नेशनल हाईवे पर गोलाबारी
पाकिस्तानियों ने टाइगर हिस पर कब्जा करने के बाद श्रीनगर-लेह नेशलन हाईवे पर तोपखाने से गोलाबारी शुरू कर दी थी। इस वजह से भारतीय सेना का लेह और लद्दाख से संपर्क टूट सकता था। इस वजह से यह चोटी बहुत ही महत्त्वपूर्ण थी।
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18 ग्रेनेडियर्स को मिली थी जिम्मेदारी
टाइगर हिल को दोबारा भारतीय कब्जे में लाने के लिए भारतीय सेना के 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
'ऑपरेशन विजय' का टर्निंग प्वाइंट
भारतीय सेना ने जब 3 और 4 जुलाई, 1999 को टाइगर हिल को जीतने के लिए हमला शुरू कर दिया था। ऐसे में बाद में इस चोटी को जीत लिया गया था, जिससे पाकिस्तानी सेना का मनोबल पूरी तरह टूट गया था।
परमवीक चक्र विजेता मेजर योगेंद्र सिंह यादव
इस युद्ध में भारतीय सेना से 19 साल के ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव भी युद्ध लड़ रहे थे, जिन्होंने 15 गोलियां लगने के बाद भी पहाड़ पर चढ़ाई की और दुश्मनों के कई बंकर तबाह कर दिए। उनकी इस बहादुरी के लिए उन्हें भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र मिला।
कैप्टन सचिन निंबालकर
18 ग्रेनेडियर्स के सचिन निंबालकर ने दुर्गम रास्तों से चढ़ते हुए दुश्मनों को चकमा दिया और पीछे से हमला कर दिया, जिससे पाकिस्तानी सेना पूरी तरह से हैरान हो गई थी।
सबसे बड़ी गोलाबारी में शामिल
कारगिल युद्ध में बोफोर्स तोप और रॉकेट लांचरों का उपयोग किया गय था। इस दौरान लांचरों ने टाइगर हिल पर दुश्मनों के ठिकानों पर हजारों गोले दागे, जो कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी तोपखाना बमबारी थी।
'पॉइंट 5060' और 'पॉइंट 5140' की भूमिका
टाइगर हिल को घेरने के लिए भारतीय सेना ने सबसे पहले इसके आस-पास की चोटियों को घेरा था, जिनमें प्वाइंट 5060 और प्वाइंट 5140 पर कब्जा कर लिया था।
4 जुलाई, 1999 की सुबह लहराया था तिरंगा
कारगिल युद्ध की लड़ाई में 30 घंटे से ज्यादा आमने-सामने का युद्ध लड़ा था, जिसमें 4 जुलाई, 1999 की सुबह भारतीय सेना ने टाइगर हिल की चोटी पर तिरंगा लहराया था।
कैप्टन विक्रम बत्रा का योगदान
कारगिल युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा ने 5140' और 'पॉइंट 4875' पर मोर्चा संभाला था, हालांकि इस पूरे अभियान में उनका नारा "ये दिल मांगे मोर!" पूरे देश और टाइगर हिल पर लड़ रहे जवानों के लिए विजय का प्रतीक बन गया था।
