भारत का सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला केंद्र शासित प्रदेश, जानें यहां

भारत में कुल 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। इन सभी में 124 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं। इस लेख में हम भारत के सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाले केंद्र शासित प्रदेश के बारे में जानेंगे।

Aug 8, 2026, 16:05 IST
सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला यूटी
सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला यूटी

भारत में कुल 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। इन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हमें 124 करोड़ की अधिक की आबादी देखने को मिलती है। हालांकि, इनमें एक केंद्र शासित प्रदेश ऐसा भी है, जो कि आबादी के हिसाब से सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला केंद्र शासत प्रदेश है। हालांकि, 2019 के बाद बने केंद्र शासित प्रदेश से यह स्थिति बदली है। इस लेख में हम देश के सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाले केंद्र शासित प्रदेश के बारे में विस्तार से जानेंगे। 

2011 के हिसाब से सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला UT

साल 2011 की आधिकारिक जनगणना के आंकड़ों पर गौर करें, तो देश में सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह है। यहां प्रति वर्ग किलोमीटर में सिर्फ 46 लोगों की आबादी दर्ज हुई थी।

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2019 के बाद से बदली स्थिति 

केंद्र सरकार द्वारा 2019 में जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया, तो लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश बन गया। यहां प्रति वर्ग किलोमीटर में 4.6 व्यक्ति की आबादी दर्ज की गई थी। ऐसे में सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला यूटी लद्दाख बन गया है।

कम जनसंख्या घनत्व के प्रमुख कारण

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह बंगाल की खाड़ी में स्थित है। यहां करीब 572 छोटे-बड़े द्वीप हैं, जिनमें करीब 38 द्वीपों में पर ही लोग रह सकते हैं। वहीं, इस द्वीप का करीब 86 फीसदी एरिया उष्णकटिबंधीय वनों से घिरा हुआ है। यहां पाई जाने वाली जारवा, सेंटीनेलीज, ओंगे और शोम्पेन जैसी संरक्षित जनजातियों के निवास क्षेत्रों में बाहरी लोगों का आना और बुनियादी ढांचे के निर्माण पर कड़े सरकारी प्रतिबंध लगे हुए हैं।

लद्दाख में क्यों कम है आबादी

लद्दाख का कुल एरिया करीब 59,146 वर्ग किलोमीटर है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार, इसकी आबादी करीब 2.74 लाख थी। ऐसे में लद्दाख का जनसंख्या घनत्व मात्र 4.6 से 5 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। यह अधिक ऊंचाई वाला ठंडा रेगिस्तान है, जहां सर्दियों में तापमान -20°C से -40°C तक गिर जाता है। वहीं, काराकोरम और हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं के बीच होने के कारण यहां कृषि योग्य भूमि और पेयजल संसाधनों की कमी है। दूसरी तरफ, जब अधिक बर्फबारी होती है, कई महीनों तक यहां रास्ते बंद हो जाते हैं।

Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

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