भारत के किस शहर में है कौन-सा ऐतिहासिक दरवाजा, देखें पूरी लिस्ट

भारत के इतिहास में इसकी वास्तुकला का अहम महत्त्व देखने को मिलता है। इसमें भी दरवाजों का विशेष योगदान है। देश के अलग-अलग शहरों में हमें कई प्रमुख ऐतिहासिक दरवाजें देखने को मिलते हैं। इस लेख में हम भारत के प्रमुख दरवाजें और उनके शहरों के बारे में जानेंगे।

Jun 2, 2026, 12:33 IST
भारत के ऐतिहासिक दरवाजे
भारत के ऐतिहासिक दरवाजे

भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें ऐतिहासिक इमारतों का अधिक महत्त्व देखने को मिलता है। इस कड़ी में देश की धरोहरों में शामिल कुछ ऐसे दरवाजें भी शामिल हैं, जो कि आज भी इतिहास के पन्नों के साथ वास्तव में भी अपना वजूद रखते हैं।

देश के विभिन्न शहरों में हमें इतिहास की गवाही देते ये दरवाजें देखने को मिल जाएंगे। इन दरवाजों को सिर्फ किले की सुरक्षा के लिए नहीं बनाया गया था, बल्कि कुछ दरवाजे ऐतिहासिक घटना या जीत के तौर पर भी बने थे। इस लेख में हम देश के विभिन्न शहरों में मौजूद ऐतिहासिक दरवाजों के बारे में जानेंगे।

इंडिया गेट

इसे वॉर मेमोरियल के तौर पर बनाया गया था। प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्ध में शहीद हुए ब्रिटिश-भारतीय सैनिकों की याद में इस गेट का निर्माण किया गया था। यहां हमेशा 'अमर जवान ज्योति' प्रज्वलित रहती है।

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बुलंद दरवाजा

बुलंद दरवाजा आगरा में फतेहपुर सीकरी में स्थित है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा प्रवेश द्वार कहा जाता है, जिसे मुगल सम्राट अकबर द्वारा 1602 में गुजरत विजय की खुशी में बनवाया गया था।

कश्मीरी गेट

कश्मीरी गेट पुरानी दिल्ली में स्थित है, जिसका निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा करवाया गया था। साल 1857 में यहां अंग्रेजों और भारतीयों के बीच बहुत भयंकर युद्ध  हुआ था, जिसके निशान आज भी इस गेट पर देखे जा सकते हैं।

दिल्ली गेट और अजमेरी गेट

दिल्ली में दिल्ली गेट और अजमेरी गेट बड़े और प्रमुख रिहायशी इलाके हैं। ये दरवाजें कभी शाहजहांनाबाद(पुरानी दिल्ली) के लिए प्रवेश द्वार हुआ करते थे।

गेटवे ऑफ इंडिया

यह दरवाजा मुंबई में स्थित है, जिसका निर्माण 1911 में ब्रिटिश किंग जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी के भारत आगमन के स्वागत में किया गया था। आपको बता दें कि इस दरवाजे से ही 1948 में आखिरी ब्रिटिश सैनिक दल भारत से विदा किया गया था।

चारमीनार

हैदराबाद में स्थित चारमीनार वास्तव में एक मस्जिद और स्मारक है, लेकिन इसके चार दरवाजे हैं, जो कि चार दिशाओं में खुलते हैं। इसका निर्माण 1591 में सुल्तान मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने शहर में प्लेग नामक महामारी के समाप्त होने की खुशी में करवाया था।

ध्रुव पोल

यह दरवाजा जयपुर का सबसे चौड़ा दरवाजा है, जिसे जोरावर सिंह गेट के नाम से भी जाना जाता है। यह दरवाजा ध्रुव तारे की ओर यानि कि उत्तर दिशा में खुलता है, जिस वजह से इसे ध्रुव गेट कहा जाता है।

भड़कल दरवाजा

यह औरंगाबाद का सबसे पुराना दरवाजा है, जिसे 1612 में मलिक अंबर द्वारा मुगलों पर मिली जीत की खुशी में बनवाया गया था।

रूमी दरवाजा 

रूमी दरवाजा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित है। इसे 'अवध के हस्ताक्षर' के रूप में जाना जाता है, जिसका निर्माण 1784 में नवाब आसफ-उद-दौला द्वारा अकाल राहत कार्य के दौरान करवाया गया था। 

तीन दरवाजा

यह दरवाजा अहमदाबाद में स्थित है, जो कि भद्र किले के पूर्व में बना हुआ है। दरवाजे का निर्माण 15वीं शताब्दी में सुल्तान अहमद शाह द्वारा करवाया गया था।

सलामी दरवाजा

सलामी दरवाजा पश्चिम बंगाल के मालदा में स्थित है। इसे दाखिल दरवाजे के नाम से भी जाना जाता है, जिसका निर्माण 1425 में बंगाल के सुल्तान रहे बारबक शाह द्वारा करवाया गया था। यह दरवाजा कभी गौड़ किले का मुख्य प्रवेश द्वार हुआ करता था। ऐसे में जब भी कोई विदेशी मेहमान या फिर राजा-महाराजा इस दरवाजे से आते थे, तो  उन्हें दरवाजे पर तोप द्वारा सलामी दी जाती थी। दरवाजे का निर्माण लाल ईंटों से किया गया है, जिससे यह गौड़ की सबसे शानदार इमारतों में गिना जाता है।


Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

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