असम इस समय भयंकर बाढ़ से जूझ रहा है, जिस वजह से यहां जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इसके पीछे ब्रह्मपुत्र नदी है, जिसमें बाढ़ आने की वजह से पूरा असम डूब गया है। हालांकि, पूर्वोत्तर भारत में सिर्फ ब्रह्मपुत्र नदी ऐसी नदी नहीं है, जो कि बाढ़ का कारण बनती है, बल्कि इसके अलावा भी कई नदियां हैं, जिनसे हर साल बाढ़ या बाढ़ जैसी स्थिति बनती हैं। इस लेख में हम इन नदियों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
ब्रह्मपुत्र नदी
ब्रह्मपुत्र नदी पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी और शक्तिशाली नदी कही जाती है। यह भारत की सबसे गहरी नदियों में भी शामिल है, जो कि तिब्बत से निकलकर असम में प्रवेश करती है। मानसून के मौसम में यह नदी पहाड़ों से बड़ी मात्रा में गाद और पत्थर लेकर मैदानी इलाकों में पहुंचती है, जिस वजह से इस नदी की पानी की क्षमता खत्म हो जाती है। यही वजह है कि यह नदी बाढ़ का कारण बनती है और भारी तबाही मचाती है।
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बराक नदी
बराक नदी भी पूर्वोत्तर भारत की प्रमुख नदियों में शामिल है। यह नदी बराक घाटी समेत असम के दक्षिणी हिस्से में जलभराव के लिए जानी जाती है। यही वजह है कि इस नदी को भी बाढ़ का कारण माना जाता है।
तीस्ता नदी
तीस्ता नदी सिक्किम व उत्तर-पश्चिम बंगाल की महत्त्वपूर्ण नदियों में से एक है। यह नदी जितनी अपनी खूबसूरत पहाड़ियों के लिए जानी जाती है, उतना ही यह बाढ़ के लिए भी प्रसिद्ध है। इस नदी की कुल लंबाई 414 किलोमीटर है। आपको बता दें कि इस नदी को ‘आतंक की नदी’ भी कहा जाता है, क्योंकि मानसून में यह भारी तबाही मचाती है।
बाढ़ के लिए ये नदियां भी हैं प्रसिद्ध
पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ के लिए सुबनसिरी, मानस, दिबांग, लोहित और कपीली नदियां भी प्रमुख हैं। ये नदियां भी मानसून के दौरान अपनी उफनती धाराओं के लिए जानी जाती हैं और पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ का कारण बनती हैं। मानसून के दौरान इन नदियों में जलस्तर बढ़ने के साथ-साथ गाद की मात्रा भी बढ़ जाती है, जिससे इन नदियों में पानी की क्षमता कम हो जाती है और पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में बाढ़ से भयंकर तबाही होती है।
