दुनिया में कहां होती है Blood Rain और क्यों, जानें यहां
बारिश अमूमन सभी लोगों को पसंद है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कहां पर ब्लड रेन कहां होती है। इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे।
बारिश अमूमन सभी लोगों को पसंद होती है। आपने अलग-अलग बारिश वाले स्थानों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि दुनिया में वह जगह कौन-सी है, जहां Blood Rain होती है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे।
कहां होती है Blood Rain
Blood Rain या 'लाल बारिश' सुनने में भले ही किसी रहस्य जैसा लगे, लेकिन यह एक वैज्ञानिक और प्राकृतिक घटना है। दुनिया में यह घटना मुख्य रूप से दो अलग-अलग कारणों से यूरोप के भूमध्यसागरीय देशों और भारत के केरल राज्य में देखने को मिलती है।
यूरोप और भूमध्यसागरीय क्षेत्र
यूरोप विशेषकर स्पेन, इटली, फ्रांस, पुर्तगाल और कभी-कभी ब्रिटेन में लाल बारिश होना एक आम मौसम संबंधी घटना है। इसके पीछे उत्तरी अफ्रीका का बड़ा 'सहारा रेगिस्तान' जिम्मेदार है। जब सहारा रेगिस्तान में तेज रेतीले तूफान आते हैं, तो वहां की बारीक लाल मिट्टी, रेत और धूल के कण हवा में उड़कर काफी ऊंचाई पर ऊपरी वायुमंडल में पहुंच जाते हैं।
वायुमंडल की तेज हवाएं इस लाल धूल को हजारों किलोमीटर दूर भूमध्य सागर के पार यूरोप तक ले जाती हैं। जब ये धूल के कण नमी वाले बादलों में मिल जाते हैं, तो बारिश की बूंदों के साथ लाल मिट्टी भी नीचे गिरती है। इससे गाड़ियां, सड़कें और घर लाल रंग की धूल से सन जाते हैं। इसे ही वहां ब्लड रेन कहा जाता है।
भारत में केरल में होती है ब्लड रेन
भारत में ब्लड रेन का सबसे प्रसिद्ध और अध्ययन किया गया मामला केरल राज्य में दर्ज किया गया है। यहां विशेष रूप से 2001 और 2012 में कई हफ्तों तक रुक-रुक कर गहरे लाल रंग की बारिश हुई थी। बारिश का पानी इतना लाल था कि इससे लोगों के कपड़े तक लाल हो गए थे। शुरू में इसे लेकर कई सनसनीखेज अफवाहें उड़ीं, जैसे कि यह किसी फटे हुए उल्कापिंड का मलबा है या Aliens का कोई संकेत है।
क्या था वैज्ञानिक कारण
वैज्ञानिकों ने जब बारिश के पानी का माइक्रोस्कोप से अध्ययन किया, तो पता चला कि केरल में होने वाली लाल बारिश का कारण कोई धूल या मिट्टी नहीं थी, बल्कि यह एक जैविक घटना थी। बारिश के पानी में अच्छी मात्रा में लाल रंग के बीजाणु पाए गए।
ये बीजाणु एक खास तरह के शैवाल के थे, जिसका वैज्ञानिक नाम 'ट्रेंटेपोहलिया एन्नुलाटा' है। यह शैवाल आमतौर पर पेड़ों की छाल और चट्टानों पर नम वातावरण में उगता है। जब हवा के साथ इसके लाखों लाल बीजाणु उड़कर बादलों में मिल गए, तो बारिश का पानी खून जैसा लाल हो गया था।
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