भारत में छोटी-बड़ी मिलाकर हजारों नदियों का प्रवाह होता है। इनमें कुछ नदियां देश के भीतर बहती हैं, तो कुछ नदियों का प्रवाह अंतरराष्ट्रीय सीमा बनाते हुए होता है। इस कड़ी में क्या आप भारत की उन नदियों के बारे में जानते हैं, जो कि भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा बनाती हैं ? इस लेख में हम इन नदियों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
भारत की अंतरष्ट्रीय सीमा बनाने वाली नदियां
भारत की अंतराष्ट्रीय सीमा बनाने वाली नदियां 7 हैं, जो कि अलग-अलग देशों के साथ अपनी सीमा बनाती हैं।
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नदी
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सीमा
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झेलम नदी
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भारत-पाकिस्तान की सीमा
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सतलुज नदी
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भारत-पाकिस्तान सीमा
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रावी नदी
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भारत और पाकिस्तान
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काली नदी
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भारत-नेपाल सीमा
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मेची नदी
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भारत-नेपाल
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कलादान नदी
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भारत-म्यांमार
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कुशियारा और सूरमा
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भारत-बांग्लादेश
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काली नदी
काली नदी उत्तराखंड और नेपाल की पश्चिमी सीमा बनाती है। साल 1816 में सुगौली की संधि के बाद इस नदी को दोनों देश की सीमा माना गया था। हालांकि, इसके उद्गम स्थल को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद रहता है।
मेची नदी
मेची नदी नेपाल से निकलने के बाद भारत के बिहार राज्य में प्रवेश करती है, हालांकि इससे पहले यह भारत और नेपाल की सीमा बनाती है।
झेलम नदी
झेलम नदी भारत और पाकिस्तान की सीमा बनाती है। यह कश्मीर घाटी से बहते हुए आती है और पाकिस्तान में प्रवेश करती है। यह POK क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ-साथ चलते हुए करीब 170 किलोमीटर तक बहती है और एक प्राकृतिक सीमा बनाती है।
रावी नदी
रावी नदी पंजाब के गुरदासपुर और अमृतसर के पास बहते हुए भारत और पाकिस्तान की सीमा बनाती है।
सतलुज नदी
सतलुज नदी पंजाब के फिरोजपुर के पास कुछ हिस्सों में भारत और पाकिस्तान की सीमा बनाती है।
कलादान नदी
यह नदी भारत के मिजोरम राज्य और म्यांमार के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा बनाती है।
कुशियारा और सूरमा नदी
बराक नदी जब असम के पास बांग्लादेश के नजदीक पहुंचती है, तो यहां दो शाखाओं में बंट जाती है, जिसमें कुशियारा और सूरमा नदी है। ये दोनों नदियां ही भारत-बांग्लादेश सीमा बनाती हैं। आपको बता दें कि भारत और बांग्लादेश आपस में 54 नदियां साझा करते हैं।
हरियाभंगा नदी
यह नदी पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच दक्षिण-पश्चिमी अंतरराष्ट्रीय सीमा बनाती है। इस नदी का एरिया सुंदरवन डेल्टा क्षेत्र में आता है।
