दुनिया में यदि सबसे उम्रदराज व्यक्ति की बात करें, तो वह जीन लुईस कैलमेंट हैं। वह इकलौती ऐसी इंसान हैं, जिन्होंने आधिकारिक तौर पर 122 साल और 164 दिनों तक जीवन जिया है। उनका यह रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है। साथ ही, वैज्ञानिक शोधों द्वारा भी उनकी उम्र को प्रमाणित किया गया है। कैलमेंट मूल रूप से फ्रांस की रहने वाली थीं, जिन्होंने तीन सदियों को देखा है। इस लेख में हम उनके बारे में विस्तार से जानेंगे।
कब हुआ था जन्म
कैलमेंट का जन्म 21 फरवरी, 1875 को फ्रांस के आर्ल्स शहर में हुआ था। इसी शहर में उन्होंने 4 अगस्त, 1997 को अंतिम सांस ली थी।
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तीन सदियों की रही हैं गवाह
जीन कैलमेंट ने इतना लंबा जीवन जिया है कि वह तीन सदियों की गवाह रही हैं।
-उनका जब जन्म हुआ, तो इसके एक साल बाद अलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने टेलिफोन का पेटेंट करवाया था।
-उनका जन्म एफिल टॉवर बनने से 14 साल पहले हुआ था। ऐसे में उन्होंने अपने सामने एफिल टॉवर बनते हुए देखा है।
-वह दोनों विश्व युद्धों की गवाह रही हैं।
-उन्होंने पश्चिमी दुनिया के प्रसिद्ध चित्रकार रहे विन्सेंट वैन गॉग से भी मुलाकात की है, जो कि 1888 में उनके चाचा की दुकान पर कैनवास खरीदने के लिए पहुंचे थे।
ऐशो-आराम में जिया जीवन
जीन ने अपना पूरी जीवन ऐशो-आराम में जिया। उनके पति बहुत अमीर थे। पैसे की कमी न होने के कारण उन्होंने कभी नौकरी नहीं की और अपने जीवन के सभी शौक पूरे किये।
जीन के जीवन की मजेदार घटना
जीन के जीवन से एक मजेदार घटना जुड़ी हुई है। वह जब 90 वर्ष की थीं, तो उनका कोई वारिस नहीं था। ऐसे में उन्होंने अपने अपार्टमेंट को लेकर एक सौदा किया, जिसमें एक 47 वर्षीय वकील ने उनसे अनुबंध किया। इसके तहत वह जीन को ताउम्र 2500 फ्रैंक देंगे और जीन की मौत के बाद वह अपार्टमेंट वकील का होगा। हालांकि, वास्तव में 77 वर्ष की आयु में वकील का निधन हो गया, लेकिन जीन जिंदा थीं। वकील की मौत के बाद उनकी पत्नी ने जीन को पैसे दिये। ऐसे में परिवार ने उस घर की कीमत का दोगुना जीन को दे दिया था।
अनोखी जीवनशैली
जीन ने अपने जीवन में 21 वर्ष की आयु से धूम्रपान शुरू किया था और 117 वर्ष तक इसे जारी रखा। उनका चॉकलेट के प्रति अधिक लगाव था। वह सप्ताह भर में ही 1 किलो चॉकलेट खा जाती थीं।
क्या कहते हैं शोधकर्ता
शोधकर्ताओं का मानना है कि जीन की लंबी उम्र का राज उनका तनावमुक्त रहना है। क्योंकि, वह स्वभाव से बहुत ही चिंतामुक्त रहती थीं। जीन भोजन में अधिक मात्रा में जैतून के तेल का इस्तेमाल करती थीं और इसे अपनी त्वचा पर भी लगाती थीं।
