भारत में यूं, तो कई नदियां बहती हैं, लेकिन इनमें एक नदी ऐसी भी है, जो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चर्चाओं में आ गई है। हाल ही में कोर्ट द्वारा नदी को बचाने के लिए आदेश जारी हुए हैं, जिसके तहत नदी के किनारे से 100 मीटर के दायरे में किसी भी निर्माण या विकास कार्य पर रोक लगाई गई है। ऐसे में शीर्ष न्यायालय के इस आदेश के बाद भारत की यह नदी चर्चाओं में आ गई है। कौन-सी है यह नदी और सुप्रीम कोर्ट को क्यों देना पड़ा आदेश, जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें।
किस नदी को लेकर जारी किये गए हैं आदेश
हाली ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजस्थान की जोजारी नदी को लेकर आदेश जारी किये गए हैं। आदेश में नदी के 100 मीटर के दायरे में निर्माण और विकास कार्य पर रोक लगाने की बात कही गई है। कोर्ट द्वारा यह आदेश नदी के इकोसिस्टम को नुकसान से बचाने के लिए अंतरिम उपाय के तौर पर दिया गया है। आदेश देते हुए
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने रोक को तब तक लागू रखने के लिए कहा है, जब तक कि 'हाई फ्लड लाइन' और इकोलॉजिकल बफर जोन तय करने के साथ और उनकी सीमाएं निर्धारित करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया को पूरा नहीं कर लिया जाता है। ऐसे में अब कोर्ट द्वारा इस मामले में अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।
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500 मीटर के दायरे में नहीं होगी इंडस्ट्री
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जोजारी नदी के बचाव को लेकर यह भी निर्देश दिया गया है कि जहां फ्लड लाइन की पहचान हो गई है, उसके दोनों तरफ 500 मीटर के दायरे में किसी भी ऐसी इंडस्ट्री या गतिविधि, जिससे नदी के इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचे या फिर प्रदूषण हो, ऐसी गतिविधि की इजाजत नहीं होनी चाहिए।
कहां से कहां तक बहती है जोजारी नदी
जोजारी नदी को जोजड़ी नदी के तौर पर भी जाना जाता है। यह नदी राजस्थान के नागौर जिले के पुंदूलू गांव की पहाड़ियों से निकलती है। यहां से निकलने के बाद यह नदी जोधपुर से बहते हुए दक्षिण-पश्चिम में बालोतरा में प्रवेश करती है और मजल धूधाड़ा के पास लूनी नदी में समाहित हो जाती है।
कितनी लंबी है नदी
जोजारी नदी की कुल लंबाई 150 किलोमीटर है, जो कि लूनी की सहायक नदियों में सबसे लंबी नदी है। आपको बता दें कि जोजारी नदी विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी की एक धारा कही जाती है, जो कि खेड़ तिलवाड़ा के पास लूनी नदी में मिलती है। पहले इस नदी के किनारे गन्ना, कपास और चावल की खेती प्रमुखता से की जाती थी।
हालांकि, आज यहां के हालात अलग हैं। अब इस नदी में फैक्ट्रियों का गंदा पानी आता है, जिस वजह से सुप्रीम कोर्ट ने नदी को लेकर आदेश जारी किया है।
