अयोध्या के श्रीराम मंदिर के CEO के लिए आज फाइनल नाम तय होगा। CEO चुनने के लिए बनाई गई तीन सदस्यों वाली सर्च कमेटी द्वारा 1 सितंबर, 2026 को अपनी अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी गई है। सर्च कमेटी के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी महाराज को रिपोर्ट सौंपी है। इस कमेटी में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल विष्णुकांत चतुर्वेदी और पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हावड़े भी हैं।
कमेटी ने तीन नामों का पैनल बनाया है, जिनमें पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय, बिहार के पूर्व डीजीपी डॉ. परेश सक्सेना व IAS दिनेश चंद्र का नाम शामिल है। ट्रस्ट द्वारा इन 3 नामों में से एक पर मुहर लगाई जाएगी, जिसके बाद राम मंदिर को अपना पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिल जाएगा।
CEO के लिए यह नाम है सबसे आगे
राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के लिए सबसे आगे चल रहा है नाम पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय का चल रहा है। वह इस पद के लिए प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। पांडेय यूपी कैडर के IPS अधिकारी हैं, जिन्होंने यूपी में टास्क फोर्स और एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड के गठन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
वह यूपी में एककाउंटर स्पेशलिस्ट की भी छवि रखते थे, जिन्होंने कई बड़े अपराधियों के एनकाउंटर किए थे। वह लीडरशिप में एक बड़ा अनुभव रखते हैं।
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CEO पद के लिए मिले थे 5585 आवेदन
राम मंदिर सीईओ पद के लिए कुल 5585 आवेदन मिले थे। इनकी स्क्रीनिंग के लिए कमेटी की ओर से पात्रता, अनुभव और अन्य मानकों को शामिल किया गया था।
कमेटी ने 600 अंकों वाला एक मूल्यांकन फॉर्म बनाया था, जिसमें 3577 आवेदकों ने हिस्सा लिया था। स्क्रीनिंग के बाद 470 से अधिक अंक वाले कुल 108 उम्मीदवार अगले चरण के लिए चुने गए थे, जिनसे वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा इंटरव्यू लिया गया था।
4 दिन चली प्रक्रिया में 17 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट
राम मंदिर की सीईओ के लिए चयन प्रक्रिया कुल 4 दिन चली थी, जिनमें अंतिम रूप से 17 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। इन सभी उम्मीदवारों को अयोध्या बुलाया गया था, जिनमें एक उम्मीदवार नहीं पहुंच सका था। अंत में कमेटी ने अनुभव और कार्यक्षमता समेत विभिन्न पहलुओं को देखते हुए तीन नामों का पैनल तैयार किया था।
