उत्तर प्रदेश के किस क्षेत्र में पाई जाती है कौन-सी मिट्टी, पढ़ें पूरी जानकारी

उत्तर प्रदेश भौगोलिक, आर्थिक व समाजिक रूप से बहुत ही महत्त्वपूर्ण राज्यों में आता है। देश का सबसे बड़ा नदी तंत्र गंगा-यमुना के मैदान से होकर गुजरता है। इस लेख में हम यूपी में पाई जाने वाली मिट्टी और उनके क्षेत्रों के बारे में जानेंगे।

Jun 14, 2026, 14:31 IST
यूपी में पाई जाने वाली मिट्टी और उनके प्रकार
यूपी में पाई जाने वाली मिट्टी और उनके प्रकार

उत्तर प्रदेश जितना आर्थिक व सामाजिक रूप से महत्त्वपूर्ण है, उतना ही यह भौगोलिक रूप से भी विविधतापूर्ण भी है। भारत का सबसे बड़ा नदी तंत्र यहां के गंगा-यमुना मैदान से होकर गुजरता है। ऐसे में यूपी को तीन भौगोलिक क्षेत्रों में बांटा गया है।

इसमें भाबर और तराई क्षेत्र की मिट्टी, मध्य के मैदानी क्षेत्र की मिट्टी और दक्षिण के पहाड़ी और पठारी क्षेत्र की मिट्टी शामिल है। विभिन्न परीक्षाओं में कई बार राज्य की मिट्टी और उनके क्षेत्रों के बारे में पूछ लिया जाता है। ऐसे में यह लेख बहुत ही महत्त्वपूर्ण है।

भाबर और तराई क्षेत्र में पाई जानी वाली मिट्टी

यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश के सबसे उत्तरी क्षेत्र में आता है, जो कि हिमालय की तलहटी से मिला हुआ है। 

भाबर क्षेत्र की मिट्टी

यहां पाई जाने वाली मिट्टी कंकड़, पत्थरों और मोटे बालू से बनी हुई होती है। यह मिट्टी कृषि के लिए उपयोगी नहीं होती है।

तराई क्षेत्र की मिट्टी

यह क्षेत्र अधिक नमी और दलदली क्षेत्र के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र में पाई जाने वाली मिट्टी गाद से बनी होती है, जिसमें कार्बनिक पदार्थ और नाइट्रोजन भरपूर मात्रा में होता है। हालांकि, इस मिट्टी में फॉस्फेट कम पाया जाता है। तराई क्षेत्र की मिट्टी को चावल और गन्ने के लिए अधिक उपजाऊ माना जाता है।

मध्य मैदान में पाई जाने वाली मिट्टी

यूपी के अधिकांश भाग में जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। इस मिट्टी का निर्माण गंगा-यमुना और इनकी सहायक नदियों द्वारा लाए गए अवसादों से मिलकर होता है। इसे दो भागों में बांटा गया है, जो कि इस प्रकार हैः

खादर मिट्टी

यह मिट्टी बाढ़ के मैदानी इलाकों में पाई जाती है, जहां बाढ़ आने की वजह से नई मिट्टी की परत जमती रहती है। इस मिट्टी को बहुत उपजाऊ माना जाता है और इसमें चूना, पोटाश व मैग्निशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

बांगर मिट्टी

यह मिट्टी बाढ़ क्षेत्र से ऊपर पाई जाती है, जहां बाढ़ का पानी नहीं पहुंच पाता है। इस मिट्टी की प्रकृति दोमट होती है और इसका रंग गहरा होता है। मिट्टी में कई बार कंकड़ भी देखने को मिलते हैं।

मैदानी क्षेत्र में पाई जाने वाली मिट्टियांं

मैदानी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की मिट्टी पाई जाती है, जो कि इस प्रकार हैः

लवणीय और क्षारीय मिट्टी

यह मिट्टी मैदानी क्षेत्र के शुष्क इलाकों में पाई जाती है। इस क्षेत्र में अधिक सिंचाई और ठीक कृषि न होने की वजह से जमीन की सतह पर सफेद चादर जम जाती है, जिससे ‘ऊसर’ या ‘रेह’ नाम से जाना जाता है। इन क्षेत्रों में अलीगढ़, कानपुर और एटा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

मरुस्थलीय मिट्टी

इस प्रकार की मिट्टी पश्चिमी यूपी के कुछ हिस्सों में पाई जाती है, जो कि राजस्थान से जुड़े हुए हैं। शुष्क वातावरण होने की वजह से यहां की मिट्टी बलुई पाई जाती है।

बुंदेलखंड क्षेत्र की मिट्टी

यह मिट्टी यूपी के बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाती है, जिसमें झांसी,बांदा, ललितपुर, महोबा, मिर्जापुर, सोनभद्र और हमीरपुर जैसे जिले शामिल हैं। इस मिट्टी का निर्माण नीस और ग्रेनाइट चट्टानों के क्षरण से हुआ है, जो कि विभिन्न श्रेणियों में बंटी हुई हैंः

लाल मिट्टी 

यह मिट्टी लाल रंग की होती है, जिसमें बालू मिला हुआ होता है। इसका लाल रंग आयरन ऑक्साइड की अधिक मात्रा की वजह से होता है। लाल मिट्टी मिर्जापुर, सोनभद्र, झांसी और यूपी के दक्षिणी इलाकों में देखने को मिलेगी, जो कि दलहन व तिलहन के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

काली मिट्टी 

इस मिट्टी को रेगुर मिट्टी भी कहा जाता है, जो कि बुंदेलखंड क्षेत्र में मिलती है। इसमें दो प्रकार की मिट्टी होती है, जिसमें से एक ‘मार’ मिट्टी है। यह मिट्टी अधिक चिपचिपी, चिकनी और काली होती है, जो कि बहुत अधिक पानी को सोख सकती है। वहीं, दूसरे प्रकार की मिट्टी ‘काबर’ होती है, जो कि कम जल सोखने की क्षमता रखती है। यह कम ऊपजाऊ होती है, लेकिन कपास और चने की खेती के लिए उपयोगी होती है।

परवा मिट्टी

यह बलुई दोमट और हल्के भूरे रंग की होती है, जो कि जालौन और हमीरपुर जैसे जिलों में पाई जाती है। इस मिट्टी को अक्सर यमुना के बीहड़ इलाकों में ही पाया जाता है।

राकर मिट्टी

इस मिट्टी को पहाड़ी ढलानों पर पाया जाता है, जो कि पथरीली और भूरे रंग की होती है। यह कृषि के लिए अधिक उपयुक्त नहीं होती है।


Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

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