Viksit Bharat-G RAM G Act: ग्रामीण रोजगार को बेहतर और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने भारत-जी राम जी (ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन) अधिनियम, 2025 लागू किया है. इसके तहत रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। यहां हम इस एक्ट के कई जरुरी नियमों को जानने की कोशिश करेंगे, जिनके बारें में अक्सर कामगारों को नहीं पता होता है।
क्या है विकसित भारत-जी राम जी एक्ट 2025
केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार और विकास को नई दिशा देने के लिए विकसित भारत-जी राम जी (ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन) अधिनियम, 2025 लागू किया है। यह कानून 1 जुलाई 2026 से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू है। इसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल मजदूरी वाले रोजगार की कानूनी गारंटी दी गयी है।
नरेगा की जगह आया था यह नया कानून
नया अधिनियम, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का स्थान लिया है. हालांकि, मनरेगा के तहत चल रहे सभी कार्य नए कानून के प्रावधानों के अनुसार जारी है और उन्हें पूरा करने को प्राथमिकता दी जा रही है।
100 की जगह 125 दिन का काम
नए कानून के तहत रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। रोजगार मांगने के लिए ग्रामीण परिवार ग्राम पंचायत के माध्यम से आवेदन कर सकते है। मजदूरी का भुगतान सीधे बैंक या डाकघर खातों में डीबीटी के जरिए किया जाएगा। भुगतान साप्ताहिक आधार पर या अधिकतम दो सप्ताह के भीतर करना होता है।
कार्यस्थल पर जरुरी सुविधाओं पर जोर
कार्यस्थलों पर पेयजल, विश्राम स्थल, बच्चों के लिए छाया और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। यदि कार्यस्थल गांव से 5 किलोमीटर से अधिक दूर होगा तो श्रमिकों को मजदूरी का 10 प्रतिशत अतिरिक्त पेमेंट भी मिलेगा।
यदि 15 दिनों के भीतर काम नहीं तो क्या होगा?
किसी भी पात्र ग्रामीण परिवार द्वारा रोजगार मांगने के बाद 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो संबंधित श्रमिक बेरोजगारी भत्ता पाने के हकदार होंगे।
राज्य सरकार को पहले 30 दिनों तक अधिसूचित मजदूरी दर के कम से कम एक-चौथाई के बराबर और उसके बाद की अवधि के लिए मजदूरी दर के कम से कम आधे के बराबर बेरोजगारी भत्ता देना होगा।
श्रमिकों को कब मिलेगा मुआवजा
इस एक्ट के तहत, यदि हाजिरी सूची बंद होने के 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता है, तो श्रमिकों को मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। देरी की प्रत्येक दिन के लिए बकाया मजदूरी पर 0.05 प्रतिशत की दर से मुआवजा देना होगा।
क्या है अन्य जरुरी नियम
नए अधिनियम में पारदर्शिता और तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया है। कार्यस्थलों पर उपस्थिति फेस रिकग्निशन आधारित प्रणाली से दर्ज की जाती है। वहीं हर कार्यस्थल पर ‘जनता बोर्ड’ लगाना अनिवार्य है, जिसमें कार्य का विवरण, लागत और श्रम दिवसों की जानकारी प्रदर्शित होता रहे।
ग्राम पंचायतों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। पंजीकरण, रोजगार आवेदन, कार्यों का क्रियान्वयन, रिकॉर्ड रखरखाव और विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) तैयार करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों के पास दी गयी है। वहीं, ठेकेदारों और श्रमिकों को विस्थापित करने वाली भारी मशीनों के उपयोग पर पूरी तरह से रोक का प्रावधान है।
