भारत में आपने अलग-अलग वनस्पतियों के बारे में पढ़ा और सुना ही होगा। इस कड़ी में एक एक ऐसी भी वनस्पति है, जिसे ‘Green Gold’ के नाम से भी जाना जाता है। खास बात यह है कि पहले इसे पेड़ की श्रेणी में रखा गया था, लेकिन बाद में सरकार ने इसे घास की श्रेणी में डाल दिया। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
किस वनस्पति को कहा जाता है ‘Green Gold’
आपको बता दें कि बांस को हरा सोना या ‘Green Gold’ के नाम से भी जाना जाता है। इसे यह नाम आर्थिक, सामाजिक और इसके पर्यावरणीय गुणों के लिए दिया गया है।
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क्यों कहा जाता है ‘Green Gold’
सोना जिस प्रकार किसी भी व्यक्ति को समृद्धि देता है, ठीक वैसे ही बांस भी मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आजीविका का मुख्य स्रोत होता है और यह धरती की सेहत के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। यही वजह है कि भारत सरकार ने भी इसके महत्त्व को समझा और 'राष्ट्रीय बांस मिशन' के तहत इसे 'ग्रीन गोल्ड' के रूप में बढ़ावा दिया है।
बांस में कम लागत और ज्यादा मुनाफा
बांस ऐसी घास है, जो कि पूरी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती है। इसकी कुछ प्रजातियां एक दिन में ही कई फीट तक बढ़ जाती हैं। वहीं, जहां अन्य लकड़ियों को तैयार होने में 20 से 40 साल का समय लगता है, जबकि बांस सिर्फ 3 से 5 साल में तैयार हो जाता है। इसे एक बार लगाने पर कई बार काटा जा सकता है, क्योंकि यह उसी स्थान पर अपने आप निकल आता है।
क्या हैं बांस के उपयोग
बांस को ‘गरीबों की लकड़ी’ भी कहा जाता है। इससे टोकरी, झाडूं, चटाई और झोपड़ियां बनाई जाती हैं। हालांकि, आज के समय में इससे फर्नीचर और मॉड्यूलर घर भी बनाए जा रहे हैं। बांस से इको-फ्रेंडली बोतलें, कप, चम्मच, टूथब्रश और स्ट्रॉ तक बनाए जाते हैं। वहीं, बांस के रेशों से मुलायम कपड़े से लेकर कागज तक बनाए जाते हैं।
पर्यावरण के लिए है उपयोगी
बांस अन्य पेड़ों की तुलना में 35 से 40 फीसदी ऑक्सीजन छोड़ता है और कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है। ऐसे में ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने के लिए यह बहुत उपयोगी है। इसकी जड़ें जमीन में मजबूती से पकड़ बनाती हैं, जिससे मिट्टी का कटाव नहीं होता है और मिट्टी बहने से रूक जाती है।
आपको बता दें कि पहले बांस पेड़ की श्रेणी में आता था, लेकिन 2017 में एक संशोधन के माध्यम से इसे घास की श्रेणी में डाल दिया, जिससे अब किसान अपने खेत में इसे उगा सकता है और इसे काटने के लिए वन्य विभाग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।
